पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, केवल यात्रा दस्तावेज: विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। जानें पासपोर्ट सेवाओं और नागरिकता नियमों से जुड़ी पूरी जानकारी।

Jun 24, 2026 - 20:35
 0  0
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, केवल यात्रा दस्तावेज: विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट की कानूनी स्थिति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट का प्राथमिक कार्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में पासपोर्ट सेवाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है और आवेदकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पासपोर्ट होना अपने आप में नागरिकता का पूर्ण प्रमाण नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया गया एक दस्तावेज है।

पासपोर्ट सेवाओं में व्यापक विस्तार और आंकड़े

मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए हैं। 5 करोड़ से अधिक पासपोर्ट और उससे संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं। 39 करोड़ थी। यह आंकड़ा भारतीयों के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्रा के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाता है और सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे में भी भारी निवेश किया है। 10 साल पहले देश भर में केवल 77 पासपोर्ट केंद्र थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 545 हो गई है। केंद्रों की संख्या में यह छह गुना बढ़ोतरी नागरिकों की सुविधा के लिए की गई है। मंत्रालय ने बताया कि पिछले साल 10 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) खोले गए थे और इस साल 10 और नए केंद्र खोलने की योजना है।

प्रक्रिया में तेजी और कार्यकुशलता

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में आई तेजी के बारे में भी जानकारी दी और अधिकारी के अनुसार, पुलिस वेरिफिकेशन के समय को छोड़कर, पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में अब केवल 6 कामकाजी दिन लगते हैं। इसके अलावा, पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में आवेदक को अपना काम पूरा करने में 45 मिनट से भी कम समय लगता है। यह सुधार सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैश्विक स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत

भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश देने वाले देशों की संख्या अब बढ़कर 27 हो गई है, जो 2019 में केवल 16 थी। इसके अलावा, 47 देश भारतीयों को 'वीजा ऑन अराइवल' की सुविधा प्रदान कर रहे हैं और 66 देश इलेक्ट्रॉनिक वीजा (ई-वीजा) की सुविधा देते हैं। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि विशेष रूप से यूरोपीय देशों के साथ 'मोबिलिटी एग्रीमेंट' (आवाजाही से जुड़े समझौते) किए गए हैं और ये समझौते शिक्षाविदों, छात्रों, प्रशिक्षुओं, सामान्य पर्यटकों और व्यापारियों की आसान आवाजाही में सहायक होते हैं। साथ ही, ये समझौते अवैध प्रवासियों की सुरक्षित और आसान वापसी के लिए एक व्यवस्थित तंत्र भी तैयार करते हैं।

नागरिकता कानून और कानूनी प्रावधान

पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने के पीछे ठोस कानूनी आधार हैं। कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद हुआ है, तो केवल जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या आधार कार्ड उसकी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। नागरिकता कानून के तहत, 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति तब तक नागरिकता का दावा नहीं कर सकता जब तक कि उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक न हो। इस संदर्भ में 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया है। उस मामले में, जस्टिस केयू चंडीवाल ने चार व्यक्तियों को राहत देने से इनकार कर दिया था, जिन पर अवैध प्रवासी होने का आरोप था। हालांकि उन्होंने पासपोर्ट (जो बाद में रद्द कर दिए गए थे), आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र पेश किए थे, लेकिन अदालत ने कहा कि कानून के तहत यह साबित करना अनिवार्य है कि आवेदक के माता-पिता भारतीय नागरिक थे। कानून के अनुसार, 26 जनवरी 1950 या उसके बाद लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मा व्यक्ति जन्म से भारतीय है, लेकिन उसके बाद की अवधि के लिए माता-पिता की नागरिकता अनिवार्य शर्त है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow