बंगाल में ईवीएम अग्निकांड: कोलकाता की सरकारी इमारत में 4000 मशीनें खाक, साजिश की आशंका

कोलकाता की एक सरकारी इमारत में आग लगने से 4000 ईवीएम नष्ट हो गईं। पुलिस साजिश के पहलू की जांच कर रही है क्योंकि आग ने बीच की मंजिलों को छोड़ दिया।

Jun 12, 2026 - 22:35
 0  0
बंगाल में ईवीएम अग्निकांड: कोलकाता की सरकारी इमारत में 4000 मशीनें खाक, साजिश की आशंका

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अलीपुर इलाके में एक नौ मंजिला सरकारी इमारत में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है, जिसमें लगभग 4000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) जलकर खाक हो गई हैं। इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है और अधिकारियों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है और जिस इमारत में यह आग लगी, वहां विभिन्न सरकारी विभागों के अलावा दक्षिण 24 परगना जिला परिषद का कार्यालय भी स्थित है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश या तोड़फोड़ की गई थी।

नुकसान का विवरण और ईवीएम का महत्व

पश्चिम बंगाल के मंत्री कौशिक चौधरी ने घटना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अग्निकांड में करीब 4000 ईवीएम पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। ये मशीनें राज्य में इस साल हुए विधानसभा चुनावों के दौरान बेहद महत्वपूर्ण थीं, क्योंकि इनका उपयोग 10 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया के लिए किया गया था। इतनी बड़ी संख्या में चुनावी उपकरणों का नष्ट होना सुरक्षा और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मंत्री ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद स्थिति का जायजा लिया और नुकसान की पुष्टि की।

आग फैलने के तरीके पर उठे सवाल

मंत्री कौशिक चौधरी ने आग लगने के पैटर्न पर गहरा संदेह व्यक्त किया है। उनके अनुसार, यह कोई सामान्य आग नहीं लग रही है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आग सबसे पहले इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर देखी गई थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आग ने चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को प्रभावित किए बिना सीधे सातवीं, आठवीं, नौवीं और दसवीं मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया।

चौधरी ने पत्रकारों से बात करते हुए सवाल उठाया कि आग बीच की मंजिलों को छोड़कर ऊपरी मंजिलों तक कैसे पहुंच गई? " उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस बात की गहनता से जांच कर रहा है कि क्या यह किसी तोड़फोड़ का परिणाम है। फिलहाल पूरी टीम फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि आग लगने के सही कारणों और उसके फैलने की प्रक्रिया को समझा जा सके।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की जांच

इस मामले में दक्षिण 24 परगना प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अलीपुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) द्वारा दर्ज की गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच की प्रक्रिया शुरू की। जांच दल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या आग बिजली की खराबी यानी शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी या इसके पीछे कोई अन्य बाहरी कारण था। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक आग लगने की कोई एक निश्चित वजह सामने नहीं आई है और सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है।

फोरेंसिक जांच और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जांचकर्ताओं का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि आग कई मंजिलों में किस तरह फैली। साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया गया है और वहां लोगों के आने-जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और पुलिस ने परिसर के आसपास निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी है। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम जल्द ही मौके का मुआयना करेगी और आग के स्रोत का पता लगाने के लिए नमूने एकत्र करेगी। अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि फोरेंसिक जांच के नतीजे ही यह तय करेंगे कि यह घटना एक हादसा थी या किसी ने जानबूझकर इसे अंजाम दिया था।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप

इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री सुकान्त मजूमदार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तोड़फोड़ की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है और वहीं, भाजपा नेता राकेश सिंह ने आरोप लगाया कि यह आग एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। हालांकि, इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट पर ही भरोसा करेंगे। इसके साथ ही, इमारत में रखे अन्य सरकारी दस्तावेजों, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रणालियों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow