महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर जलाए

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर जलाकर ईरान पर हमलों का विरोध किया और नेताओं पर दर्ज FIR की निंदा की।

Mar 4, 2026 - 18:35
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महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर जलाए

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार, 04 मार्च 2026 को श्रीनगर में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान पर इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए कथित हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के विरोध में आयोजित किया गया था और प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन और पोस्टर दहन

श्रीनगर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पीडीपी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पोस्टर ले रखे थे और अमेरिका व इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महबूबा मुफ्ती ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के पोस्टरों को आग के हवाले किया। इन पोस्टरों में जेफरी एपस्टीन का भी जिक्र था, जिनका नाम हाल ही में एपस्टीन फाइल्स के माध्यम से चर्चा में रहा है। मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह दमन के खिलाफ खड़े लोगों के साथ एकजुटता से खड़ी हैं और कयामत के दिन तक इन नीतियों का विरोध करती रहेंगी।

सांसद आगा रुहुल्लाह और जुनैद मट्टू पर एफआईआर की निंदा

महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन के दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सांसद आगा रुहुल्लाह और जुनैद अजीम मट्टू के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर की कड़ी आलोचना की और उन्होंने कहा कि ईरान पर हुए आक्रमण और वहां के सर्वोच्च नेता की शहादत पर भारत सरकार की चुप्पी का यह अर्थ नहीं है कि इस मुद्दे पर बोलने वाले लोग अपराधी हैं। मुफ्ती के अनुसार, इन नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है और उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इन एफआईआर को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।

मीडिया प्रतिबंधों और सेंसरशिप पर उठाए सवाल

विरोध प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती ने स्थानीय मीडिया संगठनों और समाचार चैनलों के सोशल मीडिया खातों पर लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना किसी भी लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन यहां बोलने वालों पर कानून के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और राष्ट्रीय प्रशासन इस मुद्दे पर बोलने वालों को निशाना बना रहे हैं, जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

मीरवाइज उमर फारूक ने की हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग

कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और आहत भावनाओं की अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। मीरवाइज ने उन खबरों पर चिंता व्यक्त की जिनमें महिलाओं और नाबालिगों सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निरंतर सेंसरशिप की नीति की समीक्षा की जाए।

क्षेत्रीय एकजुटता और बंद का आह्वान

ईरान में हुई घटनाओं के विरोध में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में एकजुटता देखी गई और मीरवाइज उमर फारूक के अनुसार, कश्मीर घाटी से लेकर पीर पंजाल और जम्मू तक के मुसलमानों ने इस घटना पर शोक और निंदा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में मनाया गया बंद उस एकजुटता की एक शांतिपूर्ण और सशक्त अभिव्यक्ति है जो दमन के खिलाफ खड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय और नैतिक चेतना का प्रतीक है जो उत्पीड़ितों के साथ खड़ी है।

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