मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, विपक्ष दो हफ्ते में लाएगा प्रस्ताव

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस ने इसके लिए विपक्षी दलों से संपर्क किया है।

Sep 24, 2026 - 18:35
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, विपक्ष दो हफ्ते में लाएगा प्रस्ताव

देश के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है क्योंकि विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े कदम की अगुवाई कांग्रेस पार्टी कर रही है जिसने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ तालमेल बिठाने के लिए संपर्क साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले दो सप्ताह के भीतर संसद के दोनों सदनों में इस महाभियोग प्रस्ताव का औपचारिक नोटिस पेश किया जा सकता है। विपक्षी गठबंधन यानी INDI गठबंधन ने इस संवैधानिक प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

SIR और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस पूरे विवाद की जड़ में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवाल हैं। विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच इस मुद्दे पर लंबे समय से असहमति बनी हुई है। हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर ही पिछले 10 महीनों के दौरान कई बार आंतरिक मतभेद उभर कर सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर खुद आयोग के भीतर से ही आपत्तियां जताई गई थीं।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां और आंतरिक मतभेद

इंडियन एक्सप्रेस की एक विस्तृत रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के 'SIR' के दौरान नाम जोड़ने और हटाए जाने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में इन दोनों आयुक्तों ने कई बार आयोग के निर्णयों पर अपनी असहमति जताई थी। विपक्षी दलों ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पुराना नोटिस और 73 सांसदों के हस्ताक्षर

यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठी है। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दलों ने इससे पहले भी उन्हें पद से हटाने के लिए नोटिस दिए थे। जानकारी के मुताबिक, अप्रैल 2026 में राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की ओर से उन्हें हटाने का एक नोटिस दिया गया था। उस समय इस नोटिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई थी। अब कांग्रेस एक बार फिर सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर दोनों सदनों में नए सिरे से प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में जुटी है ताकि इस मुद्दे को तार्किक परिणति तक पहुंचाया जा सके।

संवैधानिक प्रक्रिया और अनुच्छेद 324(5)

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से हटाना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके लिए भारतीय संविधान में एक विशेष व्यवस्था दी गई है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में एक निर्धारित और जटिल प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है और विपक्ष अब इसी संवैधानिक मार्ग का अनुसरण करने की योजना बना रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

चुनाव आयोग की सफाई और पक्ष

विपक्ष के इन हमलों और मीडिया में चल रही खबरों के बीच निर्वाचन आयोग ने भी अपना पक्ष रखा है। आयोग की ओर से दी गई सफाई में कहा गया है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना एक सामान्य और स्वस्थ प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने जोर देकर कहा कि उसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय पूरी तरह से स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं और कानूनी ढांचे के अनुरूप हैं और इसके बावजूद, विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है और उसका मुख्य ध्यान उन आपत्तियों पर है जो अन्य दो आयुक्तों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठाई थीं।

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