यूक्रेन के ओलेशकी शहर में तीन दिन का संघर्ष विराम लागू, जानें पूरी रिपोर्ट और मुख्य बातें
रूस और यूक्रेन ने ओलेशकी शहर में तीन दिन के युद्धविराम पर सहमति जताई है, जिससे मानवीय सहायता पहुंचाई जाएगी।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर लंबे समय के बाद आखिरकार एक महत्वपूर्ण सहमति बन गई है। बातचीत की प्रक्रिया से जुड़े हुए एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह संघर्ष विराम आगामी सत्ताइस अक्टूबर से पूरी तरह प्रभावी होगा। अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के नेतृत्व वाले एक विशेष मानवीय मिशन के तहत रूस और यूक्रेन के बीच दक्षिणी यूक्रेन के ओलेशकी शहर में स्थानीय युद्धविराम को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता हुआ है। यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार दिमित्रो लुबिनेट्स ने जानकारी देते हुए बताया कि यह युद्धविराम आगामी मंगलवार यानी सत्ताइस अक्टूबर की सुबह चार बजे मॉस्को समयानुसार से शुरू होगा। यह मिशन की शुरुआत से दो दिन पहले लागू होगा और कई दिनों तक लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रभावित क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षित निकासी का लक्ष्य
शुक्रवार को यूक्रेन, रूस और अमेरिका के वार्ताकारों के बीच हुए इस महत्वपूर्ण समझौते का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य रूसी कब्जे वाले ओलेशकी शहर में फंसी हुई आम जनता तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी मानवीय सहायता पहुंचाना है। इसके साथ ही वहां से फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना भी इस समझौते का अहम हिस्सा है। व्हाइट हाउस से मिली जानकारी के अनुसार, मेलानिया ट्रंप ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान इस गंभीर और भयावह स्थिति को जानने के बाद सीधे तौर पर रूस और यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस सराहनीय पहल के लिए फर्स्ट लेडी का खुले दिल से आभार जताया है और इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की थी।
बारूदी सुरंगें हटाने के अभियान से होगी शुरुआत
यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार दिमित्रो लुबिनेट्स ने मीडिया को बताया कि यह पूरा अभियान बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण है, जिसे पूरी सावधानी के साथ चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सहायता काफिले के प्रवेश और नागरिकों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ओलेशकी शहर के रास्तों पर बिछाई गई बारूदी सुरंगों यानी माइंस को पूरी तरह से हटाया जाएगा। रूस के जनरल स्टाफ के प्रमुख, जनरल वालेरी गेरासिमोव ने भी इस बात की पुष्टि की है कि रूसी सेना मंगलवार से खेरसॉन क्षेत्र में युद्धविराम का पूरी तरह पालन करेगी और सुरक्षित रास्ते के निर्माण के लिए इलाके की इंजीनियरिंग टोह यानी विस्तृत जांच करेगी। रूस की मानवाधिकार लोकपाल याना लांत्रतोवा ने कहा कि इस युद्ध क्षेत्र से बाहर जाने के इच्छुक प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित रास्ता देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बच्चों को बचाना और परिवारों को मिलाना मुख्य लक्ष्य
मेलानिया ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार मार्क बेकमैन के अनुसार, यह घोषित युद्धविराम उनके उस व्यापक मानवीय मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत वह इस विनाशकारी युद्ध के कारण अपने परिवारों से बिछड़ गए रूसी और यूक्रेनी बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। वह अब तक इस मानवीय प्रयास के तहत करीब तीन दर्जन बच्चों को उनके बिछड़े हुए परिवारों से सफलतापूलक मिला चुकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि फर्स्ट लेडी का मुख्य ध्यान और एकमात्र लक्ष्य इन मासूम बच्चों को सुरक्षित बचाना और उन्हें उनके अपनों तक पहुंचाना है।
वाशिंगटन और कीव के बीच तनाव के बावजूद समझौता
यह मानवीय समझौता एक ऐसे संवेदनशील समय में सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन और यूक्रेन की सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हडसन इंस्टीट्यूट में दिए गए अपने एक ऑनलाइन संबोधन के दौरान ओलेशकी युद्धविराम का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि एलन मस्क के स्टारशील्ड और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट की स्पीड पर लगाई गई पाबंदियां और अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर की आपूर्ति पर रोक अभी भी यथावत जारी है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने इस भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका की कूटनीतिक और निर्णायक भूमिका को बेहद अहम बताया है।
ओलेशकी शहर में बेहद बदतर हो चुके हैं हालात
निप्रो नदी के किनारे बसा ओलेशकी शहर फरवरी दो हजार बाईस में रूसी हमले के शुरू होने के पहले ही दिन से मॉस्को के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ चुका है। जून दो हजार तेरह में काखोव्का बांध में हुए विनाशकारी विस्फोट के बाद आई भीषण बाढ़ के कारण इस ऐतिहासिक शहर को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा था। वर्तमान स्थिति यह है कि वहां न तो बिजली की कोई व्यवस्था बची है, न पानी की नियमित सप्लाई है और न ही ठंड से बचने के लिए हीटिंग की कोई सुविधा उपलब्ध है। भीषण सर्दी के मौसम की शुरुआत होने से ठीक पहले वहां किसी तरह जीवित बचे हुए शेष नागरिकों के सामने भूख और गंभीर बीमारियों से असमय मौत का बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिसके चलते इस स्थानीय युद्धविराम को वहां के लोगों के लिए एक जीवनदायी कदम माना जा रहा है।
What's Your Reaction?