राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर, खत्म होगा जल संकट

राजस्थान और हरियाणा के बीच 34,102 करोड़ रुपये की यमुना जल परियोजना पर समझौता हुआ। 295 दशमलव 5 किमी लंबी पाइपलाइन से शेखावाटी का जल संकट दूर होगा।

Jun 29, 2026 - 18:35
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राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर, खत्म होगा जल संकट

उत्तर भारत की जल सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से लंबित यमुना जल परियोजना के संबंध में एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। लगभग 32 वर्षों से लंबित यह परियोजना अब एक निर्णायक चरण में पहुंच गई है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में इस समझौते पर मुहर लगाई गई, जो राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में जल संकट को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस परियोजना के माध्यम से राजस्थान के जल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।

जल सहयोग में एक नया अध्याय

लगभग 34,102 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना राजस्थान के जल प्रबंधन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस MoA पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह समझौता न केवल दो राज्यों के बीच सहयोग का प्रतीक है, बल्कि यह केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में अंतर्राज्यीय जल विवादों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी सफलता भी है।

मुख्यमंत्री ने जताया प्रधानमंत्री का आभार

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन में जल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग की एक नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। मुख्यमंत्री ने नर्मदा परियोजना, जल जीवन मिशन, केन-बेतवा लिंक परियोजना और राम जल सेतु लिंक जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यमुना जल परियोजना भी इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है और उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

परियोजना की तकनीकी विशेषताएं

इस परियोजना के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक लगभग 295 दशमलव 5 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान को 577 एमसीएस यमुना का पानी प्राप्त होगा। तकनीकी दृष्टि से यह परियोजना काफी उन्नत होगी, जिसमें 3 दशमलव 6 मीटर व्यास की तीन अंडरग्राउंड पाइपलाइनें शामिल होंगी। इसके अलावा, परियोजना में निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय और एक आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी और यह परियोजना केवल राजस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि हरियाणा के लिए भी लाभकारी होगी, क्योंकि इसमें हरियाणा में भी 10 स्थानों पर पीने का पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

भविष्य का रोडमैप और विकास

राजस्थान सरकार ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर ली है और इसे केंद्रीय जल आयोग के E-PAMS पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। हरियाणा सरकार ने भी पाइपलाइन अलाइनमेंट को अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इस विशाल परियोजना के निर्माण और सुचारू संचालन के लिए राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर परियोजना-SPV (RHYW-SPV) का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक पहल राजस्थान की आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इससे शेखावाटी सहित प्रदेश के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को एक नई गति और दिशा मिलेगी।

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