राजस्थान में टल सकते हैं पंचायत चुनाव:तय नहीं हुआ OBC आरक्षण

राजस्थान में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी के कारण 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने की समय सीमा पर संकट। डेटा त्रुटियों पर आयोग ने जताई आपत्ति।

Mar 7, 2026 - 08:35
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राजस्थान में टल सकते हैं पंचायत चुनाव:तय नहीं हुआ OBC आरक्षण

राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच एक नया प्रशासनिक गतिरोध सामने आया है और राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी के कारण इस समय सीमा का पालन करना चुनौतीपूर्ण लग रहा है। आयोग ने हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखकर सूचित किया है कि जनाधार प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए पिछड़े वर्ग की जनसंख्या के आंकड़े अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं।

डेटा में विसंगतियां और आयोग की आपत्ति

ओबीसी आयोग के अनुसार, वर्तमान में उपलब्ध डेटा के आधार पर पंचायतों के वार्ड पंचों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग की सीटों का आरक्षण निर्धारित करना संभव नहीं है। आयोग ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि जनाधार प्राधिकरण और पंचायतीराज विभाग द्वारा दी गई सूचनाओं में भारी विसंगतियां हैं और आयोग ने मांग की है कि सभी जिला कलेक्टर्स को सही सूचना और डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि आरक्षण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक और सटीक तरीके से पूरा किया जा सके।

जनसंख्या के आंकड़ों पर उठे सवाल

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या और ओबीसी जनसंख्या को शून्य दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त, 118 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या केवल 1 से 500 के बीच दिखाई गई है, जबकि पंचायतीराज विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी पंचायत का गठन 1200 से अधिक की जनसंख्या पर ही किया जाता है। आयोग का कहना है कि 266 पंचायतों में जनसंख्या 501 से 1000 के बीच दर्शाई गई है, जो जमीनी हकीकत और विभागीय नियमों के विपरीत है। इन आंकड़ों की त्रुटियों के कारण एससी और एसटी वर्ग के आरक्षण से संबंधित सूचनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

हाईकोर्ट का आदेश और समय सीमा का दबाव

राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक करा लिए जाएं। कोर्ट ने सरकार को 31 दिसंबर तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया था। हालांकि, ओबीसी आयोग का कार्यकाल पहले ही तीन बार बढ़ाया जा चुका है और अब इसकी वर्तमान समय सीमा 31 मार्च निर्धारित है। डेटा की कमी के कारण आयोग द्वारा इस तिथि तक रिपोर्ट सौंपने पर संशय बना हुआ है, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

सरकार के पास उपलब्ध कानूनी विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ओबीसी आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं दे पाता है, तो राज्य सरकार के पास अदालत जाने के कुछ सीमित विकल्प बचते हैं। सरकार कोर्ट में तर्क दे सकती है कि ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और सटीक आरक्षण निर्धारण के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसके अलावा, सरकार 113 नगर निकायों के चुनाव स्थगित कराने के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर चुकी है, जिसमें वार्ड परिसीमन की त्रुटियों को आधार बनाया गया है।

आयोग का गठन और प्रशासनिक स्थिति

राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 9 मई 2025 को राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन किया था। सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन भाटी की अध्यक्षता वाले इस आयोग में चार अन्य सदस्य शामिल हैं। पंचायतीराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा है कि सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कोर्ट के निर्णय के अनुरूप चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी और डेटा संबंधी विवाद पर फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।

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