राजस्थान में दूध बोनस के 400 करोड़ बकाया, अमूल के खिलाफ पशुपालकों का महाकुंभ
राजस्थान में 400 करोड़ रुपये का दूध बोनस बकाया होने का दावा। अजमेर में अमूल के खिलाफ सरस सहकार महाकुंभ में पशुपालकों ने दी सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी।
राजस्थान की राजनीति और सहकारिता क्षेत्र में एक बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर किसानों और पशुपालकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है। डोटासरा ने दावा किया है कि पूरे राजस्थान में पशुपालकों के दूध बोनस के करीब 400 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने कहा कि यह बकाया राशि न मिलने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालक आज गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। डोटासरा के अनुसार, किसान अपने दूध, बकरी और अनाज को बेचकर जो पैसा कमाता है, उसी से वह अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार के इलाज का खर्च उठाता है, लेकिन सरकार की बेरुखी ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
अजमेर में सरस सहकार महाकुंभ का आयोजन
अजमेर के तबीजी फार्म के पास स्थित कच्छावा गार्डन में 'सरस सहकार महाकुंभ' का भव्य आयोजन किया गया। इस महाकुंभ में राजस्थान के 15 जिलों से हजारों की संख्या में किसान और पशुपालक अपनी मांगों को लेकर पहुंचे। इस शक्ति प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के स्थानीय सहकारी नेटवर्क 'सरस' को बचाना और प्रदेश में 'अमूल' के बढ़ते विस्तार का विरोध करना था। मंच से एक सुर में 'अमूल भगाओ-सरस बचाओ' का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि यदि राजस्थान में अमूल के विस्तार को बढ़ावा दिया गया, तो इस आंदोलन की गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी।
सरकारी नीतियों और बुनियादी ढांचे पर प्रहार
महाकुंभ के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार को स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे मुद्दों पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में गरीबों को उचित इलाज नहीं मिल रहा है और सरकारी स्कूलों में न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही शिक्षक और इसके अलावा, उन्होंने किसानों को मिलने वाली नकली खाद और नकली दवाइयों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। डोटासरा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से तुलना करते हुए कहा कि पिछले पांच साल में 10 लाख गरीबों को पट्टे दिए गए थे, लेकिन वर्तमान सरकार में हाईकोर्ट के स्टे के कारण गरीबों के काम रुके हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायती राज, सहकारिता, छात्रसंघ और नगर निकाय के चुनाव पिछले ढाई साल से टल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के मॉडल का कड़ा विरोध किया और उन्होंने आरोप लगाया कि इस मॉडल के माध्यम से राज्यों के स्वतंत्र सहकारी ढांचे को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि राजस्थान के पशुपालक सरस की कीमत पर अमूल का कब्जा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे और उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि अमूल के विस्तार से जुड़ा निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो सहकारिता से जुड़े लोग न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि सरस केवल एक ब्रांड नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के लाखों पशुपालकों की आजीविका का आधार है।
महाकुंभ में शामिल हुए प्रमुख नेता
इस विशाल महाकुंभ में कई प्रमुख नेताओं ने शिरकत की। इनमें पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़, महिला कांग्रेस अध्यक्ष सारिका सिंह और विधायक विकास चौधरी शामिल थे और इनके अलावा कई पूर्व विधायक, 15 जिला दुग्ध संघों के प्रतिनिधि और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े अनेक पदाधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पशुपालकों के हितों की रक्षा करने और सरस डेयरी के नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने की बात कही। यह आयोजन राजस्थान में सहकारी डेयरी क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
What's Your Reaction?