रिलायंस जियो आईपीओ: मार्च तक डीआरएचपी दाखिल होने की संभावना, विवरण जारी

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स मार्च के अंत तक डीआरएचपी दाखिल कर सकती है। 2026 में लिस्टिंग की संभावना और बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी बिक्री पर विस्तृत रिपोर्ट।

Mar 26, 2026 - 14:35
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रिलायंस जियो आईपीओ: मार्च तक डीआरएचपी दाखिल होने की संभावना, विवरण जारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की दूरसंचार और डिजिटल सेवा शाखा, जियो प्लेटफॉर्म्स, अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी मार्च के अंत तक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है। यह सार्वजनिक निर्गम भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होने की संभावना जताई जा रही है। बाजार के घटनाक्रमों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस निर्गम के माध्यम से कंपनी के शेयर 2026 की पहली छमाही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सकते हैं।

जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज के तहत एक प्रमुख इकाई है जो दूरसंचार सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल समाधान प्रदान करती है। इस आईपीओ की चर्चा लंबे समय से बाजार में चल रही थी, और अब इसके औपचारिक दस्तावेजों को दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में जियो को भेजे गए आधिकारिक ईमेल का फिलहाल कोई औपचारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

सार्वजनिक निर्गम की संरचना और समयसीमा

बाजार सूत्रों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ पूरी तरह से या मुख्य रूप से एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रूप में हो सकता है और इसका अर्थ है कि कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा सार्वजनिक निवेशकों को बेचेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, डीआरएचपी मार्च के अंत तक दाखिल किया जा सकता है, जो कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया की आधिकारिक शुरुआत होगी। लिस्टिंग की संभावित समयसीमा 2026 की पहली छमाही निर्धारित की गई है, जिससे कंपनी को बाजार की स्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

प्रमुख निवेशकों की हिस्सेदारी और बिक्री योजना

जियो प्लेटफॉर्म्स में वर्तमान में कई वैश्विक दिग्गज निवेशकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और 7% हिस्सेदारी रखता है। इनके अलावा, कुल 13 प्रमुख निवेशक कंपनी के शेयरधारकों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, ये सभी निवेशक अपनी वर्तमान हिस्सेदारी का लगभग 8% हिस्सा बेचने की तैयारी कर रहे हैं। 5% से 3% के बराबर हो सकता है। इस बिक्री के माध्यम से विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी निकालने या आंशिक निकास का अवसर मिलेगा।

मूल्यांकन और वित्तीय अनुमान

विभिन्न वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के मूल्यांकन को लेकर अलग-अलग अनुमान प्रस्तुत किए हैं। पिछले वर्ष की रिपोर्टों के अनुसार, जेफरीज ने जियो का मूल्यांकन 180 अरब डॉलर आंका था। वहीं, जेपी मॉर्गन ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस दूरसंचार और डिजिटल कारोबार का मूल्यांकन 136 अरब डॉलर बताया था। यह मूल्यांकन कंपनी की बाजार में मजबूत पकड़ और भविष्य की डिजिटल विकास संभावनाओं पर आधारित है। इतने बड़े स्तर का मूल्यांकन इस आईपीओ को न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटना बनाता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का बाजार प्रदर्शन

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों ने हाल के समय में स्थिरता दिखाई है। जहां सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 10% तक की गिरावट दर्ज की गई, वहीं रिलायंस के शेयरों पर इसका सीमित प्रभाव देखा गया। 31% की वृद्धि हुई है। 4 मार्च के बाद से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 5% की तेजी देखी गई है। 55 पर बंद हुए, जबकि कारोबारी सत्र के दौरान यह ₹1,430 के स्तर तक पहुंच गए थे।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की दिशा

जियो प्लेटफॉर्म्स का सूचीबद्ध होना रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यह न केवल कंपनी के डिजिटल व्यवसाय को एक स्वतंत्र पहचान देगा, बल्कि इसके वास्तविक बाजार मूल्य को भी स्पष्ट करेगा और 5G सेवाओं के विस्तार और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती पैठ के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। इस आईपीओ के माध्यम से होने वाली पूंजी संरचना में बदलाव कंपनी के भविष्य के विस्तार और तकनीकी निवेशों के लिए एक आधार तैयार करेगा।

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