लद्दाख के पास चीन का गुप्त एयरबेस: 6th-Gen लड़ाकू विमानों और H-20 बॉम्बर का परीक्षण
चीन ने लद्दाख के पास लोप नूर में गुप्त एयरबेस का विस्तार किया है। यहाँ J-36, J-50 और H-20 स्टील्थ बॉम्बर जैसे आधुनिक विमानों का परीक्षण किया जा रहा है।
चीन ने लद्दाख के करीब स्थित लोप नूर एयरबेस का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। यह माना जा रहा है कि यह चीन की छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए एक गुप्त टेस्टिंग साइट के रूप में काम करेगी। चीन अपने पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके शिनजियांग में एक फ्लाइट-टेस्ट फैसिलिटी का विस्तार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य अपने नेक्स्ट जेनरेशन के मिलिट्री एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट में तेजी लाना है। चीन ने हाल के समय में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का निर्माण किया है, लेकिन ये अभी टेस्टिंग फेज में हैं। ऐसे में चीन उन्हें एक सीक्रेट लोकेशन पर टेस्ट करना चाहता है, ताकि वे दुनिया की नजरों से बची रह सकें। चीन लंबे समय से अमेरिका के अडवांस्ड एयर पावर पर बढ़त पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत के लद्दाख से इस टेस्टिंग फैसिलिटी की नजदीकी के कारण भारत की चिंता भी बढ़ सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा
एससीएमपी (SCMP) के अनुसार, शिनजियांग में लोप नूर फैसिलिटी की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि वहां चार बड़े हैंगर, नए टैक्सीवे, एक गोल पैड और फ्यूल-स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गोल पैड इंजन टेस्टिंग या एयरक्राफ्ट के टर्नअराउंड के लिए बनाया गया है। यह विस्तार चीन के कई एडवांस्ड कॉम्बैट-एयरक्राफ्ट प्रोग्राम्स को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। लोप नूर के दूरदराज के इलाके में स्थित होने के कारण चीन अपनी संवेदनशील डिजाइनों की टेस्टिंग करने और उन्हें आम निगरानी से दूर रखने में कामयाब रहेगा। चीन यहां पर एच-20 स्टील्थ बॉम्बर का भी परीक्षण कर सकता है, जो फिलहाल दुनिया की नजरों से पूरी तरह दूर है।
लोप नूर में J-36 और J-50 फाइटर जेट की तैनाती
यूएस नेवी के पूर्व इंटेलिजेंस ऑफिसर और मिशेल इंस्टीट्यूट में एयरोस्पेस और चीन स्टडीज के सीनियर फेलो जे माइकल डाहम ने एससीएमपी को बताया कि इस साइट पर निर्माण अगस्त 2025 के आसपास शुरू हुआ था। यह वही समय था जब वहां पहली बार बिना पूंछ वाला एयरक्राफ्ट देखा गया था, जिसे व्यापक रूप से चीन का जे-36 छठी पीढ़ी का फाइटर माना जाता है। डाहम ने आगे बताया कि इसके ठीक सत्रह दिन बाद, एक और अगली पीढ़ी का एयरक्राफ्ट, जिसे आमतौर पर जे-एक्सडीएस या जे-50 कहा जाता है, उसी साइट पर देखा गया था। इन विमानों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि चीन अपनी वायु शक्ति को आधुनिक बनाने के लिए कितनी गोपनीयता और तेजी से काम कर रहा है।
लोप नूर एयरबेस का आकार हुआ दोगुना
डाहम के आंकड़ों के अनुसार, इस साल फरवरी तक इस फैसिलिटी में लगभग 60000 वर्ग फुट यानी 5570 वर्ग मीटर हैंगर स्पेस जोड़ा गया था। इसके अलावा 300000 वर्ग फुट से ज्यादा अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भी किया गया है। इससे लोप नूर बेस का कुल आकार लगभग दोगुना हो गया है। नए निर्माण में टेस्टिंग और इवैल्यूएशन जोन के साथ-साथ वहां तैनात कर्मचारियों के रहने की जगह भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साइट पर पहले से ही 5 किलोमीटर लंबा रनवे मौजूद था। यह साइट कम से कम 2020 से चीन के दोबारा इस्तेमाल होने वाले स्पेसक्राफ्ट प्रोग्राम से भी जुड़ी हुई थी, जो इसकी रणनीतिक अहमियत को और बढ़ाता है।
H-20 स्टील्थ बॉम्बर की टेस्टिंग की तैयारी
लोप नूर के विस्तार को देखते हुए यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि चीन यहां एच-20 स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर का भी परीक्षण कर सकता है। इस विमान को अभी तक सार्वजनिक रूप से कभी पेश नहीं किया गया है। हालांकि, लोप नूर एयरबेस पर नए इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े पैमाने को देखते हुए माना जा रहा है कि यह फैसिलिटी भविष्य में एच-20 प्रोग्राम को पूरा सपोर्ट दे सकती है। द वॉर जोन की रिपोर्ट के अनुसार, साइट के दक्षिणी एप्रन पर बने तीन हैंगर में से हर एक का साइज लगभग 80 गुणा 40 मीटर है, जो फुट में 262 गुणा 131 फीट होता है। ये हैंगर इतने बड़े हैं कि इनमें पीएलए के पास मौजूद कोई भी एयरक्राफ्ट आसानी से आ सकता है, जिसमें एच-6 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर भी शामिल है।
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