सोना चांदी की कीमतों में हलचल: पश्चिम एशिया तनाव और फेड बैठक का दिखेगा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक के कारण अगले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है।
आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी के बाजारों में भारी हलचल देखने को मिल सकती है और निवेशकों और आम उपभोक्ताओं की नजरें विभिन्न वैश्विक कारकों पर टिकी हैं जो इन कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक होंगे। यदि आप अगले कुछ दिनों में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों का सुझाव है कि थोड़ा इंतजार करना बेहतर हो सकता है क्योंकि बाजार इस अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
प्रमुख आर्थिक आंकड़े और वैश्विक संकेत
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़ों से तय होगी। निवेशकों की विशेष नजर अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों और शुरुआती परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा, यूरोप और चीन के केंद्रीय बैंकों के फैसलों और उनकी टिप्पणियों को भी बारीकी से देखा जाएगा ताकि भविष्य में वैश्विक ब्याज दरों के रुख का संकेत मिल सके। ये आंकड़े वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को दर्शाते हैं और अमेरिकी डॉलर की मजबूती पर सीधा असर डालते हैं, जिसका सोने की कीमतों के साथ उल्टा संबंध होता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव
भू-राजनीतिक अस्थिरता बाजार की गतिविधियों का एक मुख्य आधार बनी हुई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े ठिकानों के खिलाफ नए हवाई हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका असर कमोडिटी बाजारों पर देखने को मिल रहा है और ऐसी स्थितियों में, निवेशक अक्सर अपनी पूंजी को भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाने के लिए सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर ने कहा कि हालांकि महीने के अंत में होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने पर दबाव रह सकता है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते घटनाक्रम पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
पिछले सप्ताह के बाजार प्रदर्शन की समीक्षा
पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना लगभग 2572 रुपये टूट गया, जो करीब 2 प्रतिशत की गिरावट है, और यह 1 लाख 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसी तरह, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में भी बड़ी गिरावट आई और यह 6261 रुपये या लगभग 2 दशमलव 8 प्रतिशत गिरकर 2 लाख 16 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी यही रुख रहा। कॉमेक्स पर सोने की कीमतों में लगभग 2 दशमलव 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी की कीमतें सप्ताह के अंत तक 6 दशमलव 4 प्रतिशत तक गिर गईं।
डॉलर और ब्याज दरों की भूमिका
एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने सोने पर दबाव बनाया है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है और त्रिवेदी ने गौर किया कि जब भी कीमतों में सुधार के संकेत मिले, निवेशकों ने नई खरीदारी करने के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। रुपये में मामूली मजबूती भी सोने की कीमतों को सहारा देने के लिए पर्याप्त नहीं थी, क्योंकि वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर का दबदबा कायम रहा।
अगले सप्ताह के लिए बाजार का दृष्टिकोण
जैसे-जैसे हम अगले सप्ताह में प्रवेश करेंगे, कई कारक मिलकर सोने और चांदी के लिए कीमतों का रास्ता तय करेंगे और मुख्य ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और यूरोप तथा ब्रिटेन के पीएमआई आंकड़ों पर रहेगा। इसके अतिरिक्त, चीन के आर्थिक संकेतक और पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है, जिससे सोने की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक आंकड़े मजबूत रहते हैं और अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखता है, तो कीमती धातुओं पर निकट भविष्य में दबाव जारी रह सकता है।
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