ईरान का तेल धमाका: 5 डॉलर डिस्काउंट के साथ सऊदी और यूएई को पछाड़ा, 15 दिन में बेचे 50 मिलियन बैरल
ईरान ने अमेरिका के साथ डील के बाद 5 डॉलर प्रति बैरल की छूट देकर 15 दिनों में 50 मिलियन बैरल तेल बेचा है, जिससे उसने सऊदी और यूएई को पीछे छोड़ दिया है।
ईरान ने एक नई कूटनीतिक और व्यापारिक डील के बाद अपने कच्चे तेल की बिक्री में जबरदस्त तेजी ला दी है और वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे दिग्गज तेल उत्पादक देशों को पीछे छोड़ने के लिए ईरान ने एक विशेष फॉर्मूला अपनाया है। इस फॉर्मूले के तहत ईरान कच्चे तेल के हर बैरल पर 5 डॉलर का भारी डिस्काउंट दे रहा है। इस रणनीति का परिणाम यह हुआ कि ईरान ने पिछले 15 दिनों के भीतर ही 50 मिलियन बैरल तेल बेचने में सफलता हासिल की है। इस बड़े व्यापार से ईरान को कुल 3 अरब 50 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम कमाई हुई है।
सऊदी अरब और यूएई से आगे निकला ईरान
होर्मुज नाकाबंदी के खत्म होने के बाद ईरान की तेल निर्यात क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में ईरान ने जो 50 मिलियन बैरल तेल बेचा है, उसका औसत निकाला जाए तो यह प्रतिदिन 3 मिलियन बैरल से भी अधिक बैठता है। यह आंकड़ा सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों की तुलना में काफी ज्यादा है। वर्तमान में सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े निर्यातक रोजाना केवल 1 मिलियन से 2 मिलियन बैरल तेल ही बेच पा रहे हैं। ईरान की इस तेज रफ्तार ने वैश्विक तेल बाजार के समीकरणों को बदल दिया है और वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दे रहा है।
60 दिनों की विशेष छूट और आधिकारिक पुष्टि
टैंकर्स ट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई डील के बाद ईरान ने तेल बेचने की अपनी रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है। इस बात की पुष्टि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालिबफ ने भी की है। कालिबफ के अनुसार, ईरान अब पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा दाम पर तेल बेच रहा है। इस डील के तहत ईरान को अस्थाई तौर पर 60 दिनों के लिए तेल बेचने की विशेष छूट दी गई है। ईरान की पूरी कोशिश है कि इन 60 दिनों की अवधि में वह ज्यादा से ज्यादा तेल बेच सके ताकि उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
चीनी करेंसी में व्यापार और खार्ग आइसलैंड की भूमिका
मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने महज 15 दिनों के भीतर 3 अरब डॉलर यानी करीब 333 अरब रुपये का तेल बेच दिया है। ईरान ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपना तेल चीनी करेंसी में बेचा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि आने वाले समय में ईरान को अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका या डॉलर पर निर्भर न रहना पड़े और रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान अभी उस तेल को बेच रहा है जो पहले से ही टैंकरों में लोड था। ईरान ने अपने अधिकांश तेल की बिक्री खार्ग आइसलैंड के जरिए की है। खार्ग आइसलैंड होर्मुज के पास स्थित ईरान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तेल टर्मिनल है।
बिचौलिए और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान की तेल बिक्री प्रक्रिया को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है और इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान सीधे तौर पर नहीं बल्कि बिचौलियों के जरिए तेल बेच रहा है। ईरान के ये बिचौलिए एशियाई देशों की बड़ी तेल कंपनियों से सीधे संपर्क कर रहे हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से 5 डॉलर कम कीमत पर तेल देने का वादा कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान वर्तमान में 70 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल बेच रहा है। इसके विपरीत, जून के मध्य में अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। इस डिस्काउंट के कारण एशियाई कंपनियां ईरान से तेल खरीदने में रुचि दिखा रही हैं।
प्रतिबंधों का इतिहास और ओपेक की स्थिति
ईरान ओपेक का एक प्रमुख सदस्य देश है। अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होने से पहले ईरान को प्रतिदिन 4 मिलियन बैरल तेल बेचने की अनुमति थी। उस समय सऊदी अरब को 9 मिलियन बैरल तेल बेचने की छूट मिली हुई थी। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी देशों ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था और अब इस नई डील और 60 दिनों की छूट ने ईरान को एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मौका दिया है। ईरान इस मौके का पूरा फायदा उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।
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