ईरान मुद्दे पर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तीखी बहस, फोन पर हुई जोरदार हॉट टॉक

ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई 30 मिनट की तीखी फोन कॉल की पूरी जानकारी।

May 21, 2026 - 15:35
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ईरान मुद्दे पर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तीखी बहस, फोन पर हुई जोरदार हॉट टॉक

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान परमाणु समझौते को लेकर एक बेहद तीखी और तनावपूर्ण बातचीत की खबर सामने आई है। मंगलवार 19 मई को हुई इस फोन कॉल के दौरान दोनों वैश्विक नेताओं के बीच जमकर बहस हुई, जिसे 'हॉट टॉक' के रूप में देखा जा रहा है। लगभग 30 मिनट से ज्यादा समय तक चली इस बातचीत में ट्रंप और नेतन्याहू ने एक-दूसरे को अपनी बात समझाने की कोशिश की, लेकिन अंत में दोनों के बीच असहमति और भी गहरी हो गई।

शांति वार्ता बनाम सैन्य हमला

इस विवाद की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान था जिसमें उन्होंने कहा कि कतर और अन्य मध्यस्थ देश एक ऐसा मसौदा तैयार कर रहे हैं जिससे मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित की जा सके और ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन करके सलाह दी कि वे ईरान के साथ जंग को आगे न बढ़ाएं और कूटनीति को मौका दें। ट्रंप की इस बात पर इजराइली प्रधानमंत्री बुरी तरह भड़क गए। नेतन्याहू का स्पष्ट कहना था कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत सफल नहीं हो सकती है और उस पर सैन्य हमला करना ही एकमात्र विकल्प है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि ईरान पर किसी भी सूरत में भरोसा नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि ईरान जानबूझकर बातचीत के नाम पर समय बर्बाद कर रहा है ताकि वह अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित कर सके और जंग के लिए तैयार हो सके। नेतन्याहू ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि युद्ध बार-बार नहीं होते हैं और इस समय कार्रवाई करना जरूरी है।

ट्रंप का क्षेत्रीय दृष्टिकोण

नेतन्याहू की दलीलों को सुनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख साफ किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में सिर्फ इजराइल ही एकमात्र प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्षेत्र के अन्य पड़ोसी देशों से भी फोन पर बात की है और वे सभी देश युद्ध के बजाय बातचीत और शांति चाहते हैं। ट्रंप ने नेतन्याहू को समझाते हुए कहा कि कूटनीति की भी अपनी एक दुनिया होती है और इसमें समय लगता है, इसलिए वार्ता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से एक्सियोस ने जानकारी दी कि ट्रंप ने नेतन्याहू को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में बताया। ट्रंप के अनुसार, कतर और अन्य मध्यस्थ एक ऐसे पत्र या समझौते पर काम कर रहे हैं जिस पर अमेरिका और ईरान दोनों को हस्ताक्षर करने होंगे ताकि औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति को समाप्त किया जा सके। इस जानकारी के बाद इजराइली प्रधानमंत्री का गुस्सा और बढ़ गया और वे फोन रखने के बाद काफी नाराज दिखे।

नेतन्याहू की युद्ध की जिद के पीछे के कारण

स्रोत के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू के युद्ध चाहने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जिन मुद्दों पर समझौता होने की संभावना है, उनमें ईरान की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात में यह इजराइल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ईरान की मजबूती तेल-अवीव के लिए भविष्य में बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर सकती है।

दूसरा कारण इजराइल की आंतरिक राजनीति से जुड़ा है। नेतन्याहू इस समय घरेलू स्तर पर राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। इजराइल के विपक्षी नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और नफ्ताली बेन्नेट जैसे नेता युद्ध के प्रबंधन को लेकर उनकी लगातार आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में नेतन्याहू को लगता है कि ईरान के खिलाफ जंग शुरू करके वे अपनी खोई हुई लोकप्रियता को फिर से हासिल कर सकते हैं।

तीसरा और अंतिम कारण यह है कि इजराइल को लगता है कि ईरान पर हमला करने के लिए इससे बेहतर मौका दोबारा नहीं मिलेगा। वर्तमान में ऐसी खबरें हैं कि ईरान के शीर्ष नेता या तो सक्रिय नहीं हैं या अपनी जनता से कटे हुए हैं, और वहां की सेना भी लड़खड़ाई हुई स्थिति में है। नेतन्याहू इस आपदा को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और ईरान की इस कमजोरी का फायदा उठाना चाहते हैं।

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