जून में जीएसटी कलेक्शन में बंपर उछाल, सरकारी खजाने में आए 1 लाख 94 हजार करोड़ रुपये

जून 2026 में भारत का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 13 दशमलव 9 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 94 हजार 812 करोड़ रुपये हो गया है। रिफंड के बाद शुद्ध राजस्व 1 लाख 62 हजार 377 करोड़ रुपये रहा।

Jul 1, 2026 - 14:35
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जून में जीएसटी कलेक्शन में बंपर उछाल, सरकारी खजाने में आए 1 लाख 94 हजार करोड़ रुपये

भारत की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक खबर सामने आई है और जून 2026 के महीने में देश का ग्रॉस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी कलेक्शन 13 दशमलव 9 प्रतिशत की जोरदार उछाल के साथ 1 लाख 94 हजार 812 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। एक आम इंसान के नजरिए से देखा जाए तो टैक्स कलेक्शन में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी यह साफ इशारा करती है कि भारतीय बाजारों में मांग मजबूती से बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियां काफी तेज हैं। जब बाजार में सामान की बिक्री बढ़ती है और कारोबार का विस्तार होता है, तभी सरकार के खजाने में टैक्स का पैसा बढ़ता है। टैक्स के माध्यम से आने वाला यह बढ़ता पैसा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रिफंड का बड़ा आंकड़ा और शुद्ध कमाई का विवरण

सरकारी खजाने में सिर्फ ग्रॉस रेवेन्यू के मामले में ही नहीं, बल्कि रिफंड चुकाने के बाद होने वाली शुद्ध कमाई यानी नेट रेवेन्यू के मामले में भी शानदार प्रदर्शन देखा गया है। नेट आधार पर अगर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सरकार के खाते में 1 लाख 62 हजार 377 करोड़ रुपये आए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 11 दशमलव 2 प्रतिशत अधिक है। इस महीने सरकार ने रिफंड के तौर पर भी एक बड़ी राशि व्यापारियों और करदाताओं को लौटाई है। कुल 32 हजार 436 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के 25 हजार 121 करोड़ रुपये की तुलना में 29 दशमलव 1 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि सरकार करदाताओं के प्रति अपनी जवाबदेही निभा रही है और साथ ही राजस्व में भी वृद्धि सुनिश्चित कर रही है।

टैक्स के विभिन्न हिस्सों का विश्लेषण

अगर हम टैक्स के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डालें तो सेंट्रल जीएसटी यानी सीजीएसटी 37 हजार 376 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, स्टेट जीएसटी यानी एसजीएसटी 4 प्रतिशत बढ़कर 45 हजार 116 करोड़ रुपये हो गया है। घरेलू लेनदेन से होने वाला इंटीग्रेटेड जीएसटी यानी आईजीएसटी भी 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 52 हजार 282 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि देश के भीतर होने वाले व्यापार में स्थिरता के साथ विकास हो रहा है और केंद्र व राज्यों दोनों के राजस्व में सकारात्मक वृद्धि देखी जा रही है।

आयातित सामानों ने खजाना भरने में दिखाई ताकत

इस पूरे महीने के टैक्स कलेक्शन की सबसे बड़ी खासियत विदेशों से आने वाले सामानों पर लगने वाला टैक्स रहा है। आयात पर लगने वाले आईजीएसटी में 34 दशमलव 6 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया है। इसके जरिए सरकारी खजाने में सीधे 60 हजार 38 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इस भारी भरकम वृद्धि ने कुल जीएसटी कलेक्शन को एक बड़ा सहारा दिया है और अगर हम सिर्फ घरेलू स्तर पर होने वाली कमाई की बात करें, तो उसमें 6 दशमलव 5 प्रतिशत की संतुलित ग्रोथ दर्ज की गई है। इस मद में कुल 1 लाख 34 हजार 774 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यह स्पष्ट करता है कि घरेलू बाजार में स्थिरता के साथ-साथ विदेशी व्यापार और आयात गतिविधियों में काफी तेजी आई है।

राज्यों का प्रदर्शन: महाराष्ट्र का दबदबा और यूपी की रफ्तार

राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो टैक्स देने में महाराष्ट्र का दबदबा अब भी बरकरार है और इस राज्य ने 9 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ सबसे ज्यादा 30 हजार 714 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। हालांकि, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रफ्तार उत्तर प्रदेश ने दिखाई है। देश के प्रमुख राज्यों के बीच यूपी ने 19 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर दर्ज की है, जिसके जरिए 9 हजार 165 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है। अन्य राज्यों का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा है। गुजरात ने 12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 11 हजार 743 करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 10 प्रतिशत बढ़कर 12 हजार 937 करोड़ रुपये और हरियाणा ने 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10 हजार 65 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जोड़े हैं। दूसरी तरफ, बड़े राज्यों की सूची में सिर्फ तमिलनाडु ऐसा राज्य रहा जहां टैक्स कलेक्शन घटा है। वहां 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल प्राप्ति 9 हजार 776 करोड़ रुपये रही।

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