धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: 36 दिन के आंदोलन के बाद क्यों छोड़ी कुर्सी, जानें 5 बड़े कारण

नीट पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। जानें वे 5 बड़े कारण जिनकी वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

Jul 25, 2026 - 18:35
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: 36 दिन के आंदोलन के बाद क्यों छोड़ी कुर्सी, जानें 5 बड़े कारण

भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के 37वें दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने पद को छोड़ने की घोषणा की है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि छात्रों के निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें इस निर्णय के लिए विवश कर दिया। इस्तीफा देते समय धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर मंतर की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वहां जो हालात बने हुए हैं, उससे देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं का भविष्य बर्बाद न हो और वे किसी भी प्रकार की कानूनी पेचीदगियों में न फंसें, इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना त्यागपत्र देने का फैसला किया है।

मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में वे पहले ऐसे मंत्री बन गए हैं जिन्हें जनता और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दबाव में आकर अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी है। प्रधान को मोदी कैबिनेट के सबसे मजबूत और भरोसेमंद मंत्रियों में गिना जाता था। वे 2014 से ही सरकार का हिस्सा रहे हैं और शिक्षा मंत्रालय संभालने से पहले पेट्रोलियम और इस्पात जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। हालांकि, नीट पेपर लीक विवाद ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया और अंततः उन्हें पद से हटना पड़ा।

कारण 1: छात्र और विपक्ष का कड़ा रुख

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सबसे बड़ा कारण छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का अड़ियल रुख रहा। जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) इस बात पर अड़ गई थी कि जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन खत्म नहीं होगा। शुक्रवार को सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार के मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी। इस बातचीत में छात्र नेताओं ने साफ कर दिया था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही एकमात्र समाधान है। दूसरी ओर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। शनिवार को 10 जनपथ के बाहर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम पर कोई समझौता नहीं होगा।

कारण 2: संसद से लेकर सड़क तक भारी बवाल

नीट पेपर लीक का मामला केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने संसद की कार्यवाही को भी पूरी तरह ठप कर दिया। संसद का सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था, लेकिन पिछले 5 दिनों में एक भी दिन सदन सुचारु रूप से नहीं चल सका। राज्यसभा और लोकसभा दोनों में धर्मेंद्र प्रधान के मुद्दे पर हर दिन भारी हंगामा हुआ। इसके साथ ही, जनता के बीच भी आक्रोश बढ़ता जा रहा था। दिल्ली से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब बिहार के पटना और सीवान जैसे शहरों तक पहुंच गया था। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी छात्रों ने मोर्चा खोल दिया था। चूंकि इन सभी राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, इसलिए केंद्र सरकार किसी भी प्रकार का राजनीतिक जोखिम लेने की स्थिति में नहीं थी।

कारण 3: डैमेज कंट्रोल में विफलता

3 मई को जब नीट का पेपर लीक हुआ, तब से ही इस विवाद को संभालने में धर्मेंद्र प्रधान विफल रहे। शुरुआत में सरकार ने इस विरोध को गंभीरता से नहीं लिया और इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आना पड़ा। प्रधानमंत्री ने सख्त कानून बनाने की घोषणा की और वीडियो संदेश के जरिए छात्रों से शांति की अपील की। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का कोई प्रभावी बयान सामने नहीं आया और वे छात्रों से पूरी तरह कटे हुए नजर आए, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

कारण 4: अड़ियल रवैया और संवाद की कमी

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे उनके अड़ियल रवैये को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। नीट पेपर लीक के बाद उन्होंने छात्र नेताओं से सीधे संवाद करने की कोई कोशिश नहीं की और इसकी तुलना में, जब फरवरी 2025 में चंडीगढ़ में किसानों ने बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी थी, तब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद अपनी टीम के साथ वहां पहुंचकर बातचीत के जरिए विवाद को सुलझा लिया था। प्रधान के मामले में ऐसा कोई प्रयास नहीं देखा गया, जिससे छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई।

कारण 5: लापरवाही और पुरानी गलतियों से सबक न लेना

शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान पर लापरवाही के भी गंभीर आरोप लगे। 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था और उस समय भी प्रधान ही मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उस वक्त सरकार ने इसरो के वैज्ञानिक राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था जिसे पेपर लीक रोकने के उपाय सुझाने थे। राधाकृष्णन कमेटी ने अपने सुझाव तो दे दिए थे, लेकिन उन्हें पूरी तरह से लागू नहीं किया गया और इसके अलावा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में सुधार न कर पाना भी प्रधान की बड़ी विफलता मानी गई, जिसके कारण अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

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