मॉस्को में हुई रहस्यमयी काली बारिश, यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद मचा हड़कंप
यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद मॉस्को में काली बारिश हुई। तेल रिफाइनरी पर 200 ड्रोन से हमले के बाद 17 लोग घायल हुए और जहरीली गैस की चेतावनी जारी की गई।
यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष में एक बड़ी सैन्य वृद्धि के बाद, गुरुवार को रूसी राजधानी मॉस्को के निवासियों ने एक बेहद चौंकाने वाली घटना का अनुभव किया। मॉस्को के कुछ हिस्सों में काली बारिश हुई, जिसने स्थानीय लोगों को हैरत में डाल दिया। यह घटना यूक्रेन द्वारा रूस की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर किए गए अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले के ठीक बाद हुई है। इस हमले के कारण आसमान में धुएं का विशाल गुबार छा गया, जिसके बाद रिहायशी इलाकों में तेल जैसा एक चिपचिपा और काला पदार्थ बारिश की बूंदों के साथ गिरने लगा। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अजीबोगरीब घटना ने राजधानी के वातावरण को पूरी तरह से बदल दिया है और स्थानीय लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
यूक्रेन का अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला
यह काली बारिश यूक्रेन की ओर से किए गए एक व्यापक ड्रोन हमले का परिणाम मानी जा रही है। बताया गया है कि यूक्रेन ने इस हमले के दौरान लगभग 200 ड्रोन सीधे तौर पर तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर दागे थे। यह हमला यूक्रेन की उस रणनीति का हिस्सा था जिसके तहत उसने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है और रूस के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पिछले 24 घंटों के दौरान देश भर में लगभग 1000 ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को उनके वायु रक्षा नेटवर्क द्वारा रोका गया है। हालांकि, रिफाइनरी पर हुए हमले से निकले मलबे और धुएं ने पर्यावरण पर गहरा प्रभाव डाला है। बीबीसी की जानकारी के अनुसार, इन हमलों और उसके बाद हुई काली बारिश के कारण मॉस्को के आस-पास के इलाकों में कम से कम 17 लोग घायल हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और लोगों की आपबीती
यूक्रेन के हमलों और उसके बाद हुए विस्फोटों के बाद, सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इन वायरल क्लिप्स में कारों, खिड़कियों और सड़कों पर एक चिपचिपी और काली परत जमी हुई दिखाई दे रही है। कई वीडियो में लोगों को उस तैलीय तरल पदार्थ को छूते हुए दिखाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जहरीला कचरा स्थानीय रिहायशी इलाकों में किस तरह फैल गया है। मॉस्को के लोगों ने बीबीसी को बताया कि हल्की बारिश की वजह से उनके कपड़ों पर बहुत खराब काले धब्बे पड़ गए थे। यह तैलीय पदार्थ इतना चिपचिपा था कि इसे साफ करना मुश्किल हो रहा था, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।
प्रशासन का रुख और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी
ऑनलाइन फैल रहे कई वीडियो और तस्वीरों के बावजूद, नगर निगम के अधिकारियों ने शुरू में इस संकट की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश की। स्थानीय अधिकारियों ने सख्ती से इस बात से इनकार किया कि शहर में किसी तरह की तेल की बारिश हो रही थी। हालांकि, शहर के आधिकारिक टेलीग्राम चैनलों ने जरूरी स्वास्थ्य चेतावनियाँ जारी करके इन बयानों के उलट बात कही और क्षेत्रीय सरकार ने दक्षिण-पूर्वी जिलों के निवासियों को विशेष सलाह दी कि वे जहरीली गैसों को सांस के जरिए अंदर जाने से रोकने के लिए अपनी खिड़कियाँ कसकर बंद रखें। इसके अलावा, अधिकारियों ने यह भी कहा कि छोटे बच्चों वाले परिवारों, बुजुर्ग नागरिकों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को तुरंत वह इलाका छोड़ देना चाहिए ताकि वे किसी भी स्वास्थ्य जोखिम से बच सकें।
पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा चुनौतियां
इस घटना ने रूस के हवाई सुरक्षा नेटवर्क की कड़ी परीक्षा ली है। भले ही रूस ने बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, लेकिन जलती हुई रिफाइनरी से निकले मलबे और धुएं ने इस संघर्ष के पर्यावरणीय असर को सीधे मॉस्को के आम नागरिकों तक पहुंचा दिया है। रिफाइनरी से निकले काले धुएं के कण जब बारिश के साथ नीचे आए, तो उन्होंने पूरे इलाके को प्रदूषित कर दिया। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध का प्रभाव केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।
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