राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 17 साल बाद आरएमओ अर्जुन देव का तबादला, 8 आरोपी जेल में
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी रिपोर्ट के बाद आरएमओ अर्जुन देव का तबादला। 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में, 1 करोड़ 50 लाख रुपये की संपत्ति जांच के घेरे में।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और इस मामले में एक बड़ा कदम उठाते हुए रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। अर्जुन देव पिछले 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे और उन पर मंदिर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। वहीं, इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों को अदालत ने 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इस पूरे मामले में बैंक कर्मचारियों, मंदिर के स्टाफ और अन्य संदिग्धों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि इस बड़े घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
17 साल बाद आरएमओ अर्जुन देव पर गिरी गाज
अर्जुन देव वर्ष 2009 से लगातार अयोध्या में अपनी सेवाएं दे रहे थे। पिछले 17 वर्षों के दौरान उनका कई बार तबादला हुआ, लेकिन हर बार वे अपना तबादला रुकवाने में सफल रहे। हाल ही में उनका लखनऊ के लिए हुआ तबादला भी निरस्त कर दिया गया था। हालांकि, चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट में उनकी भूमिका पर सवाल उठने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से गोरखपुर भेज दिया गया है। अर्जुन देव के पास राम मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों और वायरलेस सिस्टम की निगरानी का जिम्मा था। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, वे अपनी निर्धारित ड्यूटी से इतर वीवीआईपी दर्शन और मंदिर प्रबंधन के अन्य कार्यों में भी काफी सक्रिय रहते थे। चर्चा है कि ट्रस्ट के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों से नजदीकी के कारण वे इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर टिके रहे।
जांच के घेरे में 70 से 80 लोग और बैंकों को नोटिस
इस मामले की जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 70 से 80 लोग जांच के दायरे में आ चुके हैं और उन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस ने उन छह प्रमुख बैंकों को भी नोटिस भेजा है जहां राम मंदिर ट्रस्ट के खाते संचालित होते हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक शामिल हैं। एसबीआई से उन कर्मचारियों की सूची मांगी गई है जिनकी ड्यूटी चढ़ावे की गिनती के दौरान लगाई गई थी। पुलिस को बैंक कर्मचारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की भूमिका पर संदेह है, क्योंकि वे कैश काउंटिंग की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे। इसके अलावा, अयोध्या के सभी बैंकों से ट्रस्ट के कर्मचारियों और उनके करीबियों के बैंक खातों का पूरा विवरण तलब किया गया है।
डिजिटल साक्ष्य और संपत्तियों की बरामदगी
पुलिस को अंदेशा है कि आरोपियों ने गिरफ्तारी से पहले अपने मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट और डेटा डिलीट कर दिया है। साक्ष्य जुटाने के लिए सभी आठों आरोपियों के मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से जमीन की रजिस्ट्री, बैंक पासबुक और भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहने बरामद हुए हैं। पुलिस इन गहनों की खरीद की रसीदों का मिलान कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या यह संपत्ति चोरी की रकम से बनाई गई है। सोमवार को एंटी करप्शन कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान अदालत ने आरोपियों को जेल भेज दिया। इस दौरान पुलिस ने फिलहाल उनकी रिमांड की मांग नहीं की है।
लवकुश मिश्रा की करोड़ों की संपत्ति और आरोपियों की भूमिका
जांच में आरोपी लवकुश मिश्रा की संपत्ति को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अयोध्या के शहादतगंज इलाके में उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर 1000 वर्गफीट जमीन मिली है, जिसकी कीमत लगभग 25 लाख रुपये बताई जा रही है। इस जमीन पर एक तीन मंजिला मकान बन रहा है, जिस पर 80 से 90 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस तरह कुल निवेश लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये के आसपास है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि 20 हजार रुपये महीना कमाने वाला व्यक्ति इतनी महंगी संपत्ति कैसे बना सकता है। एफआईआर के अनुसार, अन्य आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट की गई है। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू दानपात्रों की निगरानी करते थे, जबकि रमाशंकर मिश्रा उन्हें काउंटिंग रूम तक पहुंचाते थे। लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और मनीष कुमार यादव कैश काउंटिंग टीम का हिस्सा थे। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे, जबकि करुणेश पांडेय और अविनाश शुक्ला रकम के परिवहन के लिए जिम्मेदार थे। आरोपियों के पास से 12 लाख रुपये, 36 लाख रुपये और 5 लाख रुपये जैसी बड़ी नकद राशियां बरामद होने का दावा किया गया है।
चढ़ावा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट चढ़ावे की प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने जा रहा है। अब श्रद्धालुओं के लिए क्यूआर कोड के माध्यम से दान देने की सुविधा बढ़ाई जाएगी और नकद चढ़ावे के लिए वर्तमान में मौजूद 20 दानपात्रों के स्थान पर केवल एक बड़ा दानपात्र रखने का प्रस्ताव है। साथ ही, दान में मिलने वाले सोने और चांदी को सीधे सरकारी टकसाल भेजने की योजना है। इन सभी प्रस्तावों पर 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में अंतिम मुहर लग सकती है। पुलिस अब मनी ट्रेल के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की गई रकम का उपयोग कहां-कहां किया गया है।
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