राहुल गांधी आज सुल्तानपुर कोर्ट में होंगे पेश, अमित शाह टिप्पणी मामला, जानें मुख्य अपडेट

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 2018 के मानहानि मामले में आज सुल्तानपुर की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में पेश होंगे। जानिए इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी।

Oct 26, 2026 - 10:35
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राहुल गांधी आज सुल्तानपुर कोर्ट में होंगे पेश, अमित शाह टिप्पणी मामला, जानें मुख्य अपडेट

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की एक स्पेशल MP-MLA कोर्ट आठ साल बाद सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे एक चर्चित मानहानि मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि राहुल गांधी इस फैसले के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद रहेंगे। उनके आगमन को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है, और अदालत परिसर तथा उसके आसपास सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके और कानून-व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में रहे।

शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि गत 13 अक्टूबर को स्पेशल MP-MLA कोर्ट के न्यायाधीश शुभम वर्मा ने इस मामले में फैसला सुनाए जाने के लिए 26 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की थी। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सोमवार को अदालत में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना अनिवार्य है। निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार, राहुल गांधी सोमवार को करीब 11 बजे दिन में सुल्तानपुर स्थित MP-MLA कोर्ट पहुंच सकते हैं। उनके संभावित आगमन के समय को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए हैं और कोर्ट जाने वाले सभी मार्गों पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है ताकि वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन किया जा सके।

इस पूरे कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह मामला वर्ष 2018 का है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने चार अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ स्थानीय अदालत में मानहानि की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का मुख्य आरोप था कि राहुल गांधी ने उसी वर्ष कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बेंगलुरु में आयोजित एक चुनावी सभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश के तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां की थीं।

घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के सिलसिले में आठ मई 2018 को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने वर्ष 2005 के सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ हत्या के मामले का जिक्र करते हुए एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि हिंदुस्तान के लोग यह भूल गए कि भाजपा अध्यक्ष हत्या के आरोपी रहे हैं। यह एक अकाट्य सत्य है और ईमानदारी और शुचिता की बात हमेशा वह राजनीतिक पार्टी करती है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद हत्या के गंभीर मामलों के आरोपी रह चुके हों।

हालांकि, कानूनी और न्यायिक दृष्टिकोण से यह तथ्य बेहद महत्वपूर्ण है कि अमित शाह को वर्ष 2014 में ही इस पूरे मामले से अदालत द्वारा पूरी तरह से बरी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2016 में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था जिसमें यह गुहार लगाई गई थी कि भाजपा अध्यक्ष पर लगे पुराने आरोपों की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। अदालती फैसलों और कानूनी रूप से बरी किए जाने के बावजूद राहुल गांधी द्वारा दिए गए इस बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी और अंततः मानहानि का यह मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और अदालत ने इस मामले में संज्ञान लिया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद, कोर्ट ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को इस मुकदमे का सामना करने के लिए औपचारिक रूप से तलब किया था। इसके उपरांत, राहुल गांधी ने अदालत में समर्पण किया और व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जहां से उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई थी। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की तरफ से एक और कानूनी अर्जी दी गई जिसमें राहुल गांधी की आवाज के सैंपल का मिलान कराए जाने की मांग की गई थी। हालांकि, निचली अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था।

निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता पक्ष ने सेशन कोर्ट में एक रिवीजन पिटीशन यानी पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसे सेशन कोर्ट ने भी सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था और इसके पश्चात यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचा। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत और सेशन कोर्ट दोनों के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। इन तमाम कानूनी प्रक्रियाओं और कानूनी दांव-पेच के बीच आज यानी इस सुनवाई के दौरान राहुल गांधी इस मामले के सिलसिले में चौथी बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हो सकते हैं, जहां उनकी उपस्थिति पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

दूसरी तरफ, इस अदालती फैसले और राहुल गांधी के सुल्तानपुर दौरे से ठीक पहले देश की राजनीतिक फिजा में एक और बड़ा विवाद जुड़ गया है। रविवार को ही कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर एक बेहद विवादित और तीखी टिप्पणी की गई थी और खरगे के इस बयान के सामने आने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से बेहद तीखे रिएक्शन और पलटवार सामने आने लगे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए इसे गुंडों वाली भाषा बताया है और कांग्रेस पार्टी पर निचले स्तर की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहां राहुल गांधी के मानहानि मामले में सुल्तानपुर कोर्ट का यह बहुप्रतीक्षित फैसला आने वाला है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के बयान पर मचे घमासान के कारण देश की राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और इन दोनों घटनाओं का असर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी राज्यों के समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है। सुल्तानपुर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सभी की निगाहें अब अदालत के फैसले और राहुल गांधी की कोर्ट में होने वाली पेशी पर टिकी हुई हैं, जिससे यह दिन राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

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