370 रुपये की बिरयानी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन की मांग

सुप्रीम कोर्ट में 370 रुपये की बिरयानी विवाद के बाद डिजिटल कंटेंट जैसे स्टैंड-अप कॉमेडी और पॉडकास्ट के रेगुलेशन के लिए जनहित याचिका दायर की गई है।

Jul 1, 2026 - 20:35
 0  0
370 रुपये की बिरयानी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन की मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है जिसमें देश के सभी डिजिटल कंटेंट के लिए एक व्यवस्थित रेगुलेटरी सिस्टम बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस याचिका में हाल ही में चर्चा में आई 370 रुपये की बिरयानी वाली घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह घटना डिजिटल युग में संवैधानिक सुरक्षा उपायों की अनिवार्य आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह कानूनी कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद अनियंत्रित कंटेंट को जवाबदेह बनाने और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

व्यापक रेगुलेटरी सिस्टम की मांग

याचिका में स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सहित यूजर द्वारा बनाए गए सभी डिजिटल कंटेंट के लिए एक व्यापक रेगुलेटरी सिस्टम बनाने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान में डिजिटल कंटेंट के लिए किसी ठोस निगरानी तंत्र की कमी है, जिससे कई बार विवादित सामग्री बिना किसी रोक-टोक के प्रसारित होती रहती है। इस सिस्टम के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि डिजिटल अभिव्यक्ति देश के कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर रहे और किसी भी प्रकार के हानिकारक विमर्श को रोका जा सके।

370 रुपये की बिरयानी विवाद और संवैधानिक सुरक्षा

370 रुपये की बिरयानी वाली घटना से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह मामला दिखाता है कि कैसे डिजिटल दुनिया में संस्थागत सुरक्षा उपायों की जरूरत है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में स्पष्ट किया गया है कि भले ही इस विशिष्ट घटना में शामिल कॉमेडियन या कंटेंट क्रिएटर के खिलाफ कोई सीधी कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, लेकिन यह घटना एक बड़े खतरे की ओर इशारा करती है। यह दिखाती है कि कैसे एल्गोरिदम-आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाखों यूजर्स तक विवादित बयान पहुंचा सकते हैं, जिससे महिलाओं, सहमति और सम्मान के बारे में लोगों की सोच प्रभावित हो सकती है।

एल्गोरिदम और जवाबदेही का महत्व

याचिका के अनुसार, डिजिटल दुनिया में कंटेंट को बड़े पैमाने पर फैलाने के तरीकों के साथ-साथ जवाबदेही का एक मजबूत सिस्टम भी जरूरी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संवैधानिक मुद्दा हास्य, व्यंग्य या कलात्मक आजादी पर रोक लगाने का नहीं है। मुख्य चिंता यह है कि जब ऐसा कंटेंट वायरल होता है, तो क्या संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अनुरूप संस्थागत सुरक्षा उपायों की जरूरत है या नहीं। एल्गोरिदम जिस तरह से सामग्री को प्रमोट करते हैं, उससे समाज के मूल्यों पर गहरा असर पड़ सकता है, इसलिए प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य घटना

यह पूरा विवाद प्रणीत मोरे के एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से शुरू हुआ था। शो के दौरान, दर्शकों में मौजूद गुरुग्राम के हिमांशु जांगड़ा ने एक डेट का जिक्र किया था। हिमांशु ने दावा किया कि किसी महिला को 370 रुपये की बिरयानी खिलाने के बाद, वे अपने पैसे वसूलना चाहते थे, जिसका अर्थ यौन संबंधों से जोड़ा गया। इस आपत्तिजनक सोच और बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई। याचिका में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं समाज में गलत संदेश भेजती हैं और इनके प्रसार पर नियंत्रण के लिए एक तंत्र होना चाहिए।

एक्सपर्ट कमेटी के गठन की मांग

इस याचिका में अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल प्रकाशनों पर फैलाई गई गुमराह करने वाली, अपमानजनक और बदनाम करने वाले कंटेंट की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की गई है। इस कमेटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत गरिमा के बीच एक संतुलन बना रहे। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि डिजिटल युग में तकनीक के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा का भी विकास होना चाहिए ताकि किसी की गरिमा को ठेस न पहुंचे और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow