Modi 3.0 Government: मोदी सरकार का जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला, LG की बढ़ाई ताकत

Modi 3.0 Government: मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर का बड़ा फैसला लिया है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की ताकत बढ़ा दी है.

Jul 13, 2024 - 11:35
Jul 13, 2024 - 14:12
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Modi 3.0 Government: मोदी सरकार का जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला, LG की बढ़ाई ताकत

Modi 3.0 Government: मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर का बड़ा फैसला लिया है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की ताकत बढ़ा दी है. जम्मू-कश्मीर में कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 में संशोधन किया है. इसके बाद अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल के पास होगा.

इस संशोधन से पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित मामलों में उपराज्यपाल की शक्ति और अधिक बढ़ जएगी. उनके काम करने का दायरा भी बढ़ जाएगा. लगभग सभी क्षेत्रों में उन्हे वो सारे अधिकार मिल जाएंगे, जिसमें जिसमें वित्त विभाग की पूर्व सहमति की आवश्यकता होती है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी है. इसमें LG को अधिक शक्ति प्रदान करने वाले नियम जोड़े गए हैं.

क्या बदला गया है नियम

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 के तहत संशोधित नियमों में जो बिंदु जोड़ा गया है वो इस प्रकार है:-

42ए- कोई भी प्रस्ताव जिसके लिए अधिनियम के तहत ‘पुलिस’, ‘सार्वजनिक व्यवस्था’, ‘अखिल भारतीय सेवा’ और ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ (ACB) के संबंध में वित्त विभाग की पूर्व सहमति जरूरी है, तब तक स्वीकृत या अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि इसे मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष नहीं रखा जाता है.

42बी- अभियोजन स्वीकृति देने या अस्वीकार करने या अपील दायर करने के संबंध में कोई भी प्रस्ताव विधि विभाग द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा.

उमर अब्दुल्ला ने की आलोचना

केंद्र के इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'एक और संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव नजदीक हैं. यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण, अविभाजित राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए समयसीमा निर्धारित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता इन चुनावों के लिए एक शर्त है. जम्मू-कश्मीर के लोग शक्तिहीन, रबर स्टैम्प सीएम से बेहतर के हकदार हैं, जिन्हें अपने चपरासी की नियुक्ति के लिए एलजी से भीख मांगनी पड़ेगी.'

आपको बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष दर्जा रद्द कर दिया गया था. इसके अलावा पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं. इसमें से लद्दाख में विधानसभा नहीं है.

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