UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स का नया मोड़: मर्चेंट फीस पर 18 प्रतिशत GST की समीक्षा कर सकती है GST काउंसिल

सरकार को GST काउंसिल से UPI मर्चेंट फीस पर 18 प्रतिशत GST की समीक्षा की उम्मीद है। 15 अक्टूबर 2026 से नई MDR व्यवस्था लागू होगी।

Sep 25, 2026 - 06:35
 0  0
UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स का नया मोड़: मर्चेंट फीस पर 18 प्रतिशत GST की समीक्षा कर सकती है GST काउंसिल

भारत में डिजिटल भुगतान की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है क्योंकि सरकार ने उम्मीद जताई है कि GST काउंसिल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर लगने वाले 18 प्रतिशत GST की समीक्षा कर सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई MDR व्यवस्था की तैयारी कर रहा है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना और डिजिटल भुगतान के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

UPI मर्चेंट फीस पर GST का पूरा मामला

इस पूरे मामले के केंद्र में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR है। MDR वह शुल्क होता है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से भुगतान प्रणाली के संचालन के बदले लिया जाता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार UPI के माध्यम से होने वाले कुछ विशिष्ट मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है और इस शुल्क पर 18 प्रतिशत की दर से GST लगाया जाता है। सरकार के सामने अब यह मुख्य सवाल है कि इस MDR पर लगने वाले GST का वास्तविक असर कारोबारियों की जेब पर कितना पड़ रहा है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त कर उनकी परिचालन लागत को बढ़ा सकता है जिससे डिजिटल भुगतान को अपनाने की उनकी गति प्रभावित हो सकती है।

GST काउंसिल से समीक्षा की उम्मीद और पीटीआई की रिपोर्ट

पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है कि सरकार को पूरी उम्मीद है कि GST काउंसिल UPI मर्चेंट फीस पर लगने वाले 18 प्रतिशत GST के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और इसकी समीक्षा करेगी। GST काउंसिल ही वह सर्वोच्च संस्था है जो कर की दरों में बदलाव या छूट देने का अंतिम निर्णय लेती है। हालांकि सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है लेकिन अभी तक इस टैक्स को हटाने या इसमें किसी भी प्रकार की कटौती करने का कोई आधिकारिक या अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब तक GST काउंसिल की बैठक में कोई नया निर्णय नहीं होता तब तक वर्तमान 18 प्रतिशत की टैक्स व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी।

छोटे कारोबारियों और दुकानदारों पर प्रभाव

UPI आज के समय में भारत के छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए लेनदेन का सबसे प्रमुख और सरल माध्यम बन चुका है। गली-मोहल्ले की किराना दुकानों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट और मेडिकल स्टोर तक हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान करना एक सामान्य बात हो गई है। ऐसे में MDR और उस पर लगने वाले GST की लागत का सीधा असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है जिनके पास इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के सीमित साधन हैं। सरकार इस बात पर पैनी नजर रखे हुए है कि यह टैक्स व्यवस्था छोटे व्यापारियों के मुनाफे को किस तरह प्रभावित कर रही है। हालांकि इस टैक्स का वास्तविक प्रभाव व्यवसाय के प्रकार और उस पर लागू होने वाले विशिष्ट नियमों पर निर्भर करेगा।

15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था

UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ी नई MDR व्यवस्था को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना प्रस्तावित है। इस नई व्यवस्था के तहत कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाए जाने की योजना है। इसी बदलाव की पृष्ठभूमि में MDR पर लगने वाले 18 प्रतिशत GST का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। डिजिटल पेमेंट कंपनियों और व्यापारियों की नजरें अब सरकार और GST काउंसिल की अगली बैठकों पर टिकी हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 18 प्रतिशत GST को लेकर अभी कोई बदलाव तय नहीं हुआ है और भविष्य की स्थिति GST काउंसिल की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow