इजराइल में वोट चोरी के आरोपी रिहा और चुनाव आयोग का बड़ा बयान सामने आया
इजराइल में वोट चोरी और विदेशी दखल के आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है। पुलिस ने वोट खरीदने के दो आरोपियों को रिहा कर दिया है।
इजराइल में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद वोट चोरी और विदेशी दखल के गंभीर आरोपों के बीच राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। इसी बीच इजराइल के चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि चुनाव में विदेशी दखल के आरोप सही भी साबित हो जाते हैं, तब भी चुनाव के अंतिम नतीजे नहीं बदले जाएंगे। चुनाव आयोग का यह भी कहना है कि इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी कोई सवाल नहीं उठेगा और आयोग के प्रमुख नोआम सोलबर्ग ने एक वीडियो जारी कर यह बात कही। इस वीडियो संदेश के दौरान उनके साथ इजराइल की इंटरनल सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेट के प्रमुख और अटॉर्नी जनरल भी विशेष रूप से मौजूद थे।
वोट खरीदने के आरोप में गिरफ्तार दो राजनीतिक कार्यकर्ता हुए रिहा
रविवार को इजराइल पुलिस ने वोट खरीदने के शक में गिरफ्तार किए गए तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं में से दो को रिहा कर दिया है। इन संदिग्ध लोगों को मंगलवार को देश में वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया था। पुलिस की शुरुआती जांच और बयानों के अनुसार, ये सभी लोग भारी मात्रा में कैश यानी नकदी से भरे लिफाफे लेकर खुलेआम घूम रहे थे और पुलिस ने इन पर सीधे तौर पर पैसे देकर मतदाताओं के वोट खरीदने का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि, अब इनमें से दो आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत छोड़ दिया गया है। रिहा किए गए इन दोनों व्यक्तियों में से एक आरोपी को कुछ विशेष शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ा गया है, जबकि दूसरे आरोपी को कड़ी कानूनी पाबंदियों के तहत घर में ही रहने का सख्त आदेश जारी किया गया है।
गिरफ्तार लोगों का संबंध राअम पार्टी से और मंसूर अब्बास की तीखी प्रतिक्रिया
इजराइल पुलिस की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इन सभी गिरफ्तार लोगों का सीधा संबंध अरब नेतृत्व वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टी राअम यानी Raam से है और आपको बता दें कि इस पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए इजराइली चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी के शीर्ष प्रमुख मंसूर अब्बास ने इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया है। मंसूर अब्बास का यह साफ तौर पर कहना है कि यह सब कुछ सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव के आधिकारिक नतीजों को अनुचित रूप से प्रभावित करने की एक बड़ी कोशिश है।
नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को बदनाम करने का गंभीर विपक्षी आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बहुत गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू चुनाव के नतीजों को जानबूझकर बदनाम करने के लिए एक पूरी तरह से संगठित और सुनियोजित अभियान चला रहे हैं। विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने इससे पहले अतीत में अरब पार्टियों के साथ मिलकर किसी भी प्रकार की सरकार बनाने से साफ इनकार कर दिया था। लेकिन वर्तमान राजनीतिक हालात ऐसे बन चुके हैं कि इस बार के चुनावों में किसी भी एक राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें अरब पार्टियों का राजनीतिक समर्थन मिल जाता है, तो वह आसानी से देश में नई सरकार का गठन कर सकते हैं।
संसद की सीटों का गणित और अरब पार्टियों की रिकॉर्ड जीत
इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं, और देश में किसी भी दल या गठबंधन को अपनी सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सीटों के जादुई आंकड़े की सख्त आवश्यकता होती है। बीते 27 नवंबर को हुए चुनाव के आए नतीजों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक गठबंधन को कुल 53 सीटें हासिल हुई हैं, जबकि दूसरी ओर विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को कुल 48 सीटें मिली हैं। इसके अलावा, तीन प्रमुख अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने आपस में मिलकर इस चुनाव में एक नया इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड 19 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। यदि ये सभी अरब पार्टियां खुलकर गादी आइजेनकोट के साथ आ जाती हैं, तो उनके पूरे गठबंधन के पास कुल सीटों की संख्या बढ़कर 67 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। हालांकि, यह भी एक बड़ा सच है कि इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने के इस विचार को कई लोग स्वीकार करने के लिए बिल्कुल मंजूर नहीं हैं।
चुनाव नतीजों की आधिकारिक प्रमाणिकता और राष्ट्रपति की भूमिका
इजराइल के चुनाव के इन सभी फाइनल नतीजों को आगामी 4 दिसंबर को पूरी तरह से आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाना है। इस आधिकारिक प्रमाण प्रक्रिया के पूरा होने के बाद देश के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग किसी एक प्रमुख राजनीतिक उम्मीदवार को देश में नई सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करेंगे। इजराइल के संविधान और नियमों के अनुसार, नई सरकार के गठन की पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आगामी 11 नवंबर तक का समय तय किया गया है, जिसके भीतर ही सरकार का गठन होना अनिवार्य है।
नेतन्याहू के लगाए गए आरोप और कतर की कड़ी प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, इजराइल में चुनाव के नतीजों को लेकर विवाद अभी भी लगातार जारी है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की प्रमुख पार्टी लिकुड ने इससे पहले यह गंभीर आरोप लगाया था कि अरब पार्टियों ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर वोट चोरी की है। लिकुड पार्टी ने यह भी सनसनीखेज दावा किया था कि इन अरब पार्टियों ने अवैध रूप से वोट खरीदने के नापाक मकसद के लिए मध्य पूर्व के देश कतर से भारी मात्रा में पैसा लिया है। हालांकि, प्रधानमंत्री नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अपने इन तमाम बड़े आरोपों के समर्थन में देश की जनता या चुनाव आयोग के सामने एक भी ठोस सबूत पेश नहीं किया है। कतर सरकार ने भी नेतन्याहू की पार्टी द्वारा लगाए गए इन सभी निराधार आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कतर की ओर से बयान जारी कर इसे केवल झूठी और मनगढ़ंत जानकारी फैलाने की एक सोची-समझी कोशिश बताया गया है।
What's Your Reaction?