रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रचा इतिहास, 45 मिनट में कमाए 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपये

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शानदार तिमाही नतीजों के बाद शेयरों में 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई और कंपनी ने सिर्फ 45 मिनट में 1.29 लाख करोड़ रुपये की कमाई की।

Nov 2, 2026 - 13:35
 0  0
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रचा इतिहास, 45 मिनट में कमाए 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपये

भारतीय शेयर बाजार में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने शानदार वित्तीय प्रदर्शन और तिमाही नतीजों के दम पर एक नया इतिहास रच दिया है और चालू वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का शेयर अक्सर सुस्त चाल और गिरावट के दौर से गुजर रहा था, लेकिन सितंबर तिमाही के नतीजों ने तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया। शुक्रवार की शाम को जैसे ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने तिमाही नतीजों का रिपोर्ट कार्ड दुनिया के सामने रखा, निवेशकों की उम्मीदें परवान चढ़ गईं और सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही इसके शेयरों में बंपर तेजी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर तेजी के साथ 1,227 रुपये 40 पैसे पर ओपन हुए और देखते ही देखते शुरुआती 45 मिनट के भीतर ही 1,259 रुपये के साथ अपने दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को कंपनी के शेयर 1,163 रुपये 55 पैसे पर बंद हुए थे। दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर कंपनी का शेयर 7 रुपये 72 पैसे की जोरदार तेजी के साथ 1,253 रुपये 40 पैसे पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, यह शेयर अपने 53 हफ्तों के उच्चतम स्तर 1,611 रुपये 20 पैसे से अभी भी करीब 22 फीसदी नीचे की ओर ट्रेड कर रहा है, लेकिन जिस प्रकार की खरीदारी शेयरों में देखने को मिल रही है, उससे निवेशकों की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं।

मुनाफे और रेवेन्यू में रिकॉर्ड तोड़ उछाल

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट यानी शेयरधारकों के हिस्से वाले मुनाफे में सालाना आधार पर 41 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की है, जो बढ़कर अब 25,548 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले साल की समान अवधि यानी इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 18,165 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस अभूतपूर्व ग्रोथ के पीछे कंपनी के मुख्य व्यावसायिक स्तंभों जैसे ऑयल-टू-केमिकल्स यानी ओटूसी और डिजिटल सर्विसेज बिजनेस का बेहद मजबूत योगदान रहा है और इसके अलावा, कंपनी के ऑपरेशंस से होने वाला कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 3 लाख 32 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह रेवेन्यू 2 लाख 58 हजार करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल कमाई में हुई इस उल्लेखनीय बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान ऑयल-टू-केमिकल्स सेगमेंट का रहा है। इस विशेष सेगमेंट का एबिटडा सालाना आधार पर 68 फीसदी की छलांग लगाकर 15,008 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा है।

कारोबारी सत्र के दौरान वैल्यूएशन में भारी इजाफा

शेयर बाजार में आई इस तूफानी तेजी का सीधा और बड़ा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल बाजार पूंजी यानी वैल्यूएशन पर पड़ा। बीएसई पर शेयरों में 8 फीसदी से अधिक की तेजी आने के कारण कंपनी की कुल वैल्यूएशन ना केवल 17 लाख करोड़ रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के पार निकल गई, बल्कि निवेशकों को सिर्फ कुछ ही घंटों के भीतर 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बंपर फायदा भी हुआ। आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि जब रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर दिन के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, तब कंपनी की कुल वैल्यूएशन 17 लाख 4 हजार 357 रुपये 77 पैसे दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले शुक्रवार को कंपनी की वैल्यूएशन 15 लाख 75 हजार 143 रुपये 36 पैसे थी। इस प्रकार, केवल एक ही कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन में 1 लाख 29 हजार 214 रुपये 41 पैसे की भारी-भरकम वृद्धि दर्ज की गई। बाजार के वित्तीय जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में यह सकारात्मक रुख और अधिक मजबूती के साथ जारी रह सकता है।

प्रमुख ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की राय और टार्गेट प्राइस

दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर अपनी 'बाय' यानी खरीदने की रेटिंग को पूरी तरह से बरकरार रखा है। फर्म ने इस शेयर के लिए 1,710 रुपये का नया टार्गेट प्राइस तय किया है, जिसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान स्तर से इसमें करीब 47 फीसदी तक की और शानदार तेजी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज फर्म का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि ऑयल-टू-केमिकल्स सेगमेंट के बेहद शानदार प्रदर्शन की बदौलत कंपनी का कंसोलिडेटेड एबिटडा बाजार के शुरुआती अनुमानों से भी 6 फीसदी अधिक रहा है। इस अतिरिक्त मुनाफे ने रिटेल सेगमेंट में आई 6 फीसदी की कमी की बहुत अच्छे से भरपाई कर दी है। त्योहारों के समय में आए बदलाव और क्विक कॉमर्स का लगातार विस्तार होने के कारण, कोर रिटेल की ग्रोथ और एबिटडा में साल-दर-साल आधार पर कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई है। जेफरीज को पूरी उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट और रूस के रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचे नुकसान के चलते, आगामी सर्दियों के मौसम के दौरान ओटूसी सेगमेंट का मुनाफा काफी ऊंचा बना रहेगा। इसके साथ ही, ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के लिए अपने एबिटडा अनुमानों में क्रमशः 6 फीसदी और 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। फर्म का यह भी कहना है कि यह शेयर अपने लंबे समय के औसत से 2 स्टैंडर्ड डेविएशन से भी नीचे ट्रेड कर रहा है, जो निवेशकों की अत्यधिक निराशावादी भावनाओं को दर्शाता है। जेफरीज के अनुसार, अर्निंग्स में अपग्रेड और रिटेल ग्रोथ में सुधार यानी मिड-टीन्स के स्तर तक की रिकवरी इस स्टॉक की री-रेटिंग के लिए एक बहुत बड़ा उत्प्रेरक साबित हो सकती है।

नोमुरा और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमान

एक अन्य प्रमुख ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने रिलायंस के लिए अपना टार्गेट प्राइस 1,690 रुपये प्रति शेयर से थोड़ा घटाकर 1,560 रुपये कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद इसमें 34 फीसदी तक की नई अपसाइड संभावना जताई है। नोमुरा के अनुसार, कंपनी का कंसोलिडेटेड एबिटडा उनके अपने अनुमान से भी 9 फीसदी अधिक रहा है। यह बेहतर प्रदर्शन मुख्य रूप से ऑयल-टू-केमिकल्स सेगमेंट के उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर काम करने की वजह से संभव हुआ है, जबकि अपस्ट्रीम और टेलीकॉम व्यवसायों का प्रदर्शन पूरी तरह से उम्मीद के अनुरूप ही रहा है। हालांकि, रिटेल एबिटडा ब्रोकरेज के अनुमान से 10 फीसदी कम दर्ज किया गया। ओटूसी बिजनेस का एबिटडा 25,200 करोड़ रुपये रहा, जबकि नोमुरा का अनुमान 20,300 करोड़ रुपये का था। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 48 फीसदी और पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 68 रुपये की वृद्धि को दर्शाता है, जो इस सेगमेंट का अब तक का सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके अलावा, नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी आरआईएल पर अपनी 'बाय' रेटिंग को बरकरार रखते हुए 1,703 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है, जिसका अर्थ है कि इसमें निवेशकों के लिए 25 फीसदी तक की अपसाइड संभावना मौजूद है। हालांकि नुवामा ने अपना टार्गेट 1,766 रुपये से घटाया है, जिसमें जियो प्लेटफॉर्म्स की आगामी लिस्टिंग के बाद 25 फीसदी होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट को शामिल किया गया है। नुवामा का यह भी कहना है कि आरआईएल पर 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये का बेहद मामूली नेट डेट यानी कर्ज है, जो पिछले साल की तुलना में 1 फीसदी कम है। इससे कंपनी की पूंजी की भारित औसत लागत पूरी तरह से नियंत्रित बनी रहती है। अंत में, नुवामा ने अपने 'गोल्डन रिफाइनिंग एरा' यानी स्वर्ण रिफाइनिंग युग के अनुमान को कायम रखा है, जिसके तहत प्रति बैरल 10 अमेरिकी डॉलर से अधिक का सस्टेनेबल ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन मिलने की प्रबल उम्मीद है। साथ ही, रिलायंस के न्यू एनर्जी बिजनेस की शुरुआत से समय के साथ कर के बाद के मुनाफे में 50 फीसदी से ज्यादा का योगदान मिलने की संभावना है और कंपनी के 2035 तक नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य के समर्थन से वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow