इजरायल-ईरान संघर्ष: नेतन्याहू ने ट्रंप से वार्ता के बाद हमले जारी रखने को कहा

इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत के बाद ईरान और लेबनान पर हमले जारी रखने का ऐलान किया है। ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए 5 दिन की मोहलत दी है।

Mar 24, 2026 - 09:35
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इजरायल-ईरान संघर्ष: नेतन्याहू ने ट्रंप से वार्ता के बाद हमले जारी रखने को कहा

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान और लेबनान के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान किसी भी कूटनीतिक दबाव में नहीं रुकेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाल ही में हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद नेतन्याहू ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने कहा कि इजरायल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इजरायली सेना की हालिया उपलब्धियां युद्ध के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होंगी और नेतन्याहू के अनुसार, ट्रंप का भी यह मानना है कि इन सैन्य सफलताओं का लाभ उठाकर एक ऐसी स्थिति बनाई जा सकती है जो इजरायल के दीर्घकालिक हितों को सुरक्षित करे।

क्षेत्रीय तनाव के बीच यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, इजरायल ने अपनी रणनीति में किसी भी बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं और नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों और ईरान के भीतर सामरिक संपत्तियों पर हमले जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि इजरायल का लक्ष्य केवल तात्कालिक सुरक्षा नहीं, बल्कि भविष्य के खतरों को जड़ से समाप्त करना है। इस सैन्य रुख ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं और दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है।

नेतन्याहू का रुख और सैन्य अभियान की निरंतरता

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा कि इजरायल ईरान और लेबनान दोनों मोर्चों पर सक्रिय रूप से हमले जारी रखे हुए है। उन्होंने बताया कि इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने हिज्बुल्लाह की कमान संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेतन्याहू के अनुसार, लेबनान में की जा रही कार्रवाई का उद्देश्य उत्तरी इजरायल के निवासियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह की ओर से खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक सैन्य अभियान में कोई ढील नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप के साथ उनकी बातचीत में सैन्य लक्ष्यों और कूटनीतिक समझौतों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई है।

नेतन्याहू ने आगे कहा कि इजरायल किसी भी समझौते में अपने महत्वपूर्ण हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सैन्य दबाव ही एकमात्र तरीका है जिससे दुश्मनों को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है या उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है और इजरायली नेतृत्व का मानना है कि वर्तमान सैन्य अभियान ने ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इजरायल की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह बिना किसी हिचकिचाहट के किया जाएगा।

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर प्रहार

ईरान के संदर्भ में नेतन्याहू ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके परमाणु बुनियादी ढांचे को लक्षित कर रहा है और प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि हाल के दिनों में इजरायली ऑपरेशनों के दौरान 2 और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया गया है। इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न केवल उसके लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक बड़ा खतरा है। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं देगा और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

इजरायली खुफिया एजेंसियों और वायुसेना ने ईरान के भीतर कई संवेदनशील ठिकानों की पहचान की है और नेतन्याहू के अनुसार, इन ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे ताकि ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को पंगु बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इजरायल की कार्रवाई केवल रक्षात्मक नहीं है, बल्कि वह सक्रिय रूप से खतरे के स्रोतों को नष्ट कर रहा है। मिसाइल उत्पादन केंद्रों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं पर किए गए हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को प्रभावित किया है, जिसे इजरायल अपनी बड़ी रणनीतिक जीत मान रहा है।

ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नई समय सीमा

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खोलने के लिए ईरान को दी गई समय सीमा बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर संभावित हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि वह ईरान के एक 'सम्मानित' नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप का प्रस्ताव है कि किसी भी संभावित समझौते के तहत ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले में ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है और सैन्य कार्रवाई को रोका जा सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस मार्ग को खुला रखना वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में है और इसके लिए कूटनीतिक रास्ते खुले रखे गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि 5 दिनों के भीतर कोई ठोस प्रगति नहीं होती है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी कड़े कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह समय सीमा ईरान पर दबाव बनाने की एक रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

ईरान का बातचीत से इनकार और प्रतिक्रिया

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की गुप्त या प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। ईरान ने ट्रंप के बयानों को 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' करार दिया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अपनी पिछली चेतावनियों से पीछे हट रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है और ईरान ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संप्रभुता और परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

तेहरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका फेक न्यूज के माध्यम से वैश्विक वित्तीय बाजारों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। ईरान के अनुसार, ट्रंप का यह दावा कि वह किसी ईरानी नेता से बात कर रहे हैं, पूरी तरह निराधार है और ईरानी नेतृत्व ने कहा कि वे किसी भी सैन्य हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण उनकी रणनीतिक शक्ति का हिस्सा है। ईरान की इस सख्त प्रतिक्रिया ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक प्रभाव

इन भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा असर वैश्विक वित्तीय और ऊर्जा बाजारों पर देखा गया है। ट्रंप द्वारा हमले टालने और बातचीत की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमतों में कमी आने से वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है और दूसरी ओर, शेयर बाजारों में शुरुआती उछाल देखा गया, क्योंकि निवेशकों को लगा कि युद्ध का तत्काल खतरा टल सकता है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक अस्थिरता बनी रहेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। इजरायल द्वारा हमलों को जारी रखने की घोषणा और ईरान द्वारा बातचीत से इनकार ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। वर्तमान में बाजार की स्थिति पूरी तरह से अगले 5 दिनों के घटनाक्रम और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों पर निर्भर करेगी। विभिन्न देशों की सरकारें इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही हैं ताकि किसी भी बड़े आर्थिक संकट से बचा जा सके।

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