ईरान जंग के बीच 6 तेल कंपनियों ने कमाए 81 अरब डॉलर, भारत के रक्षा बजट को पछाड़ा

ईरान युद्ध के दौरान 6 बड़ी तेल कंपनियों ने 81 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया, जो भारत के 6 लाख 81 हजार करोड़ रुपये के रक्षा बजट से भी ज्यादा है।

Aug 5, 2026 - 16:35
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ईरान जंग के बीच 6 तेल कंपनियों ने कमाए 81 अरब डॉलर, भारत के रक्षा बजट को पछाड़ा

ईरान जंग शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। अल जजीरा की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के दौरान अप्रैल से जून के बीच दुनिया की 6 सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड 81 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया है। यह मुनाफा उस समय हुआ है जब पूरी दुनिया महंगाई के संकट से जूझ रही थी और ऊर्जा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी।

भारत के रक्षा बजट से भी बड़ी मुनाफे की राशि

तेल कंपनियों द्वारा कमाए गए इस मुनाफे की कुल राशि भारतीय मुद्रा में करीब 7 लाख 70 हजार करोड़ रुपये होती है। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि यह भारत के पूरे साल के रक्षा बजट से भी कहीं अधिक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत का वार्षिक रक्षा बजट 6 लाख 81 हजार करोड़ रुपये है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि युद्ध और तनाव की स्थिति में इन बड़ी तेल कंपनियों ने किस स्तर पर कमाई की है और अल जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि इन कंपनियों के लिए यह समय पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक मुनाफे वाला रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में 23 प्रतिशत का उछाल

जब ईरान जंग की शुरुआत हुई थी, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन युद्ध के गहराने और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण इसकी कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई। अप्रैल से जून के बीच कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तेल कंपनियों ने इस दौरान करीब 23 प्रतिशत का भारी मुनाफा दर्ज किया है। आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने कीमतों को ऊपर बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

महंगाई की मार और आम जनता पर असर

एक तरफ जहां तेल कंपनियां अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी और कच्चे तेल की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के कारण पेट्रोल, डीजल और बिजली की दरों में भारी इजाफा हुआ। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामानों को भी महंगा कर दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर जीवन यापन की लागत बढ़ गई। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव ने पूरी दुनिया की जेब पर सीधा असर डाला और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया।

विश्लेषकों की राय और भविष्य की चिंताएं

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि तेल की सप्लाई को लेकर बनी वैश्विक चिंता और ऊंची कीमतों ने इन कंपनियों की कमाई को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। दूसरी तिमाही के नतीजों में कई कंपनियों ने पिछले कई सालों का सबसे ज्यादा मुनाफा दर्ज किया है और विश्लेषकों का कहना है कि जब तक युद्ध की स्थिति और रणनीतिक जलमार्गों में तनाव बना रहेगा, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इन कंपनियों के रिकॉर्ड मुनाफे ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा नीतियों और संकट के समय कंपनियों की जवाबदेही पर भी नई बहस छेड़ दी है।

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