ईरान ने अमेरिका के साथ कतर में बातचीत के दावों को नकारा, ट्रंप प्रशासन को दिया जवाब

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ कतर में किसी भी स्तर की वार्ता से इनकार किया है और ट्रंप प्रशासन के दावों को खारिज किया है।

Jun 30, 2026 - 09:35
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ईरान ने अमेरिका के साथ कतर में बातचीत के दावों को नकारा, ट्रंप प्रशासन को दिया जवाब

ईरान ने कतर में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की निर्धारित बातचीत की खबरों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा किए गए दावों को पूरी तरह से नकारते हुए स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी स्तर पर कोई वार्ता तय नहीं है। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि कतर की राजधानी दोहा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी अधिकारियों के साथ चर्चा करना है। ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इन खबरों को गलत बताया और कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर हमारी कोई बातचीत तय नहीं है।

दोहा यात्रा का वास्तविक उद्देश्य

प्रवक्ता इस्माइल बगई ने जोर देकर कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की कतर यात्रा का अमेरिकी प्रतिनिधियों की वहां मौजूदगी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी टीम का दोहा दौरा केवल एक समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रावधानों, विशेष रूप से अनुच्छेद 11 के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और उसे आगे बढ़ाने के उद्देश्य से है। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि व्यापक और अंतिम समझौते पर बातचीत अभी तक शुरू नहीं हुई है। उनके अनुसार, ईरान अभी अंतिम समझौते के लिए औपचारिक बातचीत के चरण में प्रवेश नहीं कर पाया है, जो यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी एक बड़ी कूटनीतिक दूरी बनी हुई है।

औपचारिक वार्ता के लिए अनिवार्य शर्तें

ईरानी विदेश मंत्रालय ने उन शर्तों का भी विवरण दिया है जिन्हें औपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले पूरा किया जाना आवश्यक है। बगई ने बताया कि 14 सूत्रीय MoU के अनुच्छेद 13 के अनुसार, अंतिम समझौते पर बातचीत तभी शुरू हो सकती है जब अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11 के तहत तय किए गए उपायों का क्रियान्वयन शुरू हो जाए और वह लगातार जारी रहे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का मानना है कि ये सभी प्रावधान दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इन 5 प्रमुख प्रावधानों के पूरी तरह लागू होने के बाद ही अंतिम समझौते पर किसी भी प्रकार की औपचारिक वार्ता की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

अनुच्छेद 11 और फ्रीज संपत्तियों का मुद्दा

इस पूरे विवाद के केंद्र में अनुच्छेद 11 है, जो ईरान की वित्तीय स्थिति से जुड़ा है। बगई ने बताया कि अनुच्छेद 11 के तहत अमेरिका को ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित संपत्तियों और फंड को आपसी सहमति से तय की गई प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए अमेरिका को जरूरी लाइसेंस और अन्य कानूनी अनुमतियां भी जारी करनी होंगी ताकि ईरान अपने स्वयं के पैसे का उपयोग कर सके। उन्होंने इस बात को दोहराया कि अनुच्छेद 13 के मुताबिक, पहले इन 5 प्रमुख प्रावधानों का क्रियान्वयन शुरू होना और उनका निरंतर जारी रहना अनिवार्य है। इसके बिना अंतिम समझौते पर बातचीत को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

व्हाइट हाउस के दावों और ईरान के रुख में विरोधाभास

दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस ने एक अलग ही दावा पेश किया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर मंगलवार को दोहा की यात्रा करेंगे, जहां उनका उद्देश्य ईरान के साथ बातचीत करना है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह पहल हाल ही में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों पक्षों के बीच बढ़े तनाव और सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर की जा रही है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि यह बैठक ईरान के विशेष अनुरोध पर आयोजित की जा रही है। हालांकि, ईरान ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि उनकी कतर यात्रा केवल तकनीकी और पूर्व निर्धारित समझौतों की समीक्षा तक सीमित है।

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