करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने के मंत्र और सुहाग की सलामती के उपाय, जानें मुख्य अपडेट
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के दौरान मां पार्वती और चंद्रमा के विशेष मंत्रों का जाप करने से अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए कठोर निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने के साथ होती है और इसका समापन रात को चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद होता है। करवा चौथ के इस खास अवसर पर दिनभर महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, प्रथम पूज्य गणेश जी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। शाम के समय पूजा का विशेष विधान होता है जिसमें कथा सुनने और मां पार्वती का आशीर्वाद लेने की परंपरा है। इसके बाद जब रात को आसमान में चंद्रमा के दर्शन होते हैं, तब महिलाएं छलनी से चांद और अपने पति का चेहरा देखकर उन्हें जल अर्पित करती हैं, जिसे चंद्र अर्घ्य देना कहा जाता है और चंद्रमा को जल अर्पित करते समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि करवा चौथ की पूजा और अर्घ्य के दौरान किन मंत्रों का जाप किया जाना चाहिए और उनका क्या धार्मिक महत्व है।
मां पार्वती का विशेष मंत्र और उसका महत्व
करवा चौथ के पावन पर्व पर जगत जननी माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। स्रोत के अनुसार आगामी 29 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में देवी पार्वती को अखंड सौभाग्य, अटूट प्रेम और सुखी दांपत्य जीवन की देवी माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने के लिए माता पार्वती की उपासना करती हैं। पूजा के दौरान महिलाओं को माता पार्वती के इस प्रसिद्ध मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। मंत्र इस प्रकार है: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ इस पवित्र मंत्र का शाब्दिक और सरल अर्थ यह है कि हे मां गौरी, आप सभी प्रकार के मंगल कार्यों का आधार हैं और सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूरा करने वाली शक्ति हैं। मैं आपको पूरी श्रद्धा के साथ नमन करती हूँ। आप अपनी शरण में आने वाले सभी भक्तों की रक्षा करें और उन्हें उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें और मान्यता के अनुसार करवा चौथ की शाम को माता पार्वती की पूजा करते समय इस मंत्र का 11 बार सस्वर जाप करना चाहिए। इस विधि से जाप करने पर महिलाओं को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और एक सुखी वैवाहिक जीवन का वरदान प्राप्त होता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का करें जाप
करवा चौथ के व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित क्षण चंद्रमा के दर्शन करना और उन्हें जल अर्पित करना होता है। चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देने की यह परंपरा इस व्रत की मुख्य विशेषता है। इस दौरान चंद्रदेव का स्मरण करते हुए और उनके प्रति आभार प्रकट करते हुए विशेष वैदिक या पौराणिक मंत्रों का जाप किया जाना चाहिए। चंद्रमा को जल अर्पित करते समय मुख्य रूप से दो मंत्रों का उपयोग किया जाता है। पहला मंत्र है: ॐ सोम सोमाय नमः। इसके अलावा दूसरा मंत्र है: ॐ चंद्राय नमः। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इनमें से किसी भी मंत्र का 11 बार जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप पूरा करने के बाद महिलाओं को चाहिए कि वे श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़कर अपने पति की दीर्घायु, उनके उत्तम स्वास्थ्य और पूरे परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। ऐसा करने से चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।
अर्घ्य देते समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान
करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। अर्घ्य अर्पित करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि पूजा-पाठ में मन की पवित्रता का बहुत अधिक महत्व होता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पूजा की विधि और नियम अलग-अलग परिवारों, समाजों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं, इसलिए अपने घर की कुल परंपरा के अनुसार ही विधि का पालन करें। इस पावन दिन पर चंद्रदेव और मां पार्वती की सच्चे मन से पूजा करके वैवाहिक जीवन में सुख, शांति, प्रेम और सदा के लिए सौभाग्य की कामना की जाती है। इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्रों के नियमित और विधि-विधान से पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और सुहाग की डोर हमेशा मजबूत बनी रहती है।
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