चिदंबरम के कार्यकाल में 5000 निर्दोष मरे, दिमागी नक्सल होने पर उन्हें गर्व: बीजेपी

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पी चिदंबरम पर हमला करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में 5000 लोग मरे और अब वे खुद को दिमागी नक्सल बता रहे हैं।

Aug 17, 2026 - 13:35
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चिदंबरम के कार्यकाल में 5000 निर्दोष मरे, दिमागी नक्सल होने पर उन्हें गर्व: बीजेपी

दिमागी नक्सल के मुद्दे पर देश की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए बयान के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोल दिया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को सीधे निशाने पर लिया। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पी चिदंबरम को दिमागी नक्सल होने पर गर्व है, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान देश ने भारी कीमत चुकाई थी और बीजेपी का दावा है कि चिदंबरम के गृह मंत्री रहते हुए देश में 5000 निर्दोष लोगों की जान गई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से दिमागी नक्सल शब्द का उल्लेख किया था।

सुधांशु त्रिवेदी का पी चिदंबरम पर बड़ा हमला

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने संबोधन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आज के समय के हिसाब से बहुत ही सटीक विषय दिमागी नक्सल को उठाया था। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन मात्र 24 घंटे के भीतर ही वह व्यक्ति खुद सामने आ गया जिसके दिमाग में नक्सली विचार थे। त्रिवेदी के अनुसार, पी चिदंबरम ने खुद आगे आकर यह स्वीकार किया कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है और बीजेपी ने इसे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया है और कहा है कि एक पूर्व गृह मंत्री का ऐसा बयान बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक है।

कांग्रेस शासन में नक्सलवाद का विस्तार और 5000 मौतें

सुधांशु त्रिवेदी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब देश के 180 जिले नक्सलवाद की चपेट में थे। उन्होंने विशेष रूप से पी चिदंबरम के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान 5000 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विवशता के चंगुल में फंसे हुए थे और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक थी और बीजेपी का कहना है कि नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए हमेशा से एक बड़ा खतरा रहा है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय अब इसके साथ अपनी पहचान जोड़ना शुरू कर दिया है।

मनमोहन सिंह का 2006 का बयान और आज की कांग्रेस

बीजेपी ने कांग्रेस को उनके ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयानों की याद दिलाई है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी और पी चिदंबरम को याद दिलाना चाहता हूं कि 13 अप्रैल 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद स्वीकार किया था कि नक्सलवाद का खतरा भारत के इतिहास में आंतरिक सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा खतरा है। त्रिवेदी ने सवाल किया कि क्या आज की कांग्रेस मनमोहन सिंह की उस बात को सही मानती है या फिर पी चिदंबरम के उस बयान को जिसमें वह दिमागी नक्सली होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। बीजेपी ने इसे कांग्रेस के भीतर वैचारिक विरोधाभास और सुरक्षा के प्रति लापरवाही का प्रमाण बताया है।

31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य

सुधांशु त्रिवेदी ने मोदी सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जिस खतरे को मनमोहन सिंह ने 2006 में पहचाना था, उसे वर्तमान सरकार जड़ से खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने उस कार्य को सिद्ध करने का लक्ष्य रखा है जिसे पिछली सरकारें नहीं कर पाईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ देश नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के एक पूर्व गृह मंत्री को इस बात पर गर्व हो रहा है कि वे दिमागी नक्सली हैं। बीजेपी ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे तत्वों को पहचानें जो देश की प्रगति में बाधक बन रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का 15 अगस्त का संबोधन

इस पूरे विवाद की जड़ प्रधानमंत्री मोदी का वह भाषण है जो उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवाद ने देश के लाखों युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने बताया कि 2014 में उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का जो संकल्प लिया था, वह अब पूरा होने के करीब है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि आज नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है, लेकिन दिमागी नक्सल अभी भी मौके की तलाश में हैं। उन्होंने देशवासियों को आगाह किया था कि इन दिमागी नक्सलों को पहचानना बहुत जरूरी है क्योंकि ये समाज के भीतर रहकर देश विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। बीजेपी अब इसी बयान को आधार बनाकर कांग्रेस को घेर रही है।

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