नाइजीरिया में भीषण कत्लेआम: 62 लोगों की गोली मारकर हत्या, हजारों घर छोड़े
नाइजीरिया के ताराबा राज्य में बंदूकधारियों के हमले में 62 लोगों की मौत हो गई है। कई शव नदी से मिले हैं और हजारों लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं।
नाइजीरिया से इस वक्त की एक बहुत ही बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां देश के पूर्वोत्तर हिस्से में भीषण कत्लेआम को अंजाम दिया गया है। देश की आपातकालीन एजेंसी ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी कि पूर्वोत्तर नाइजीरिया में हथियारबंद बंदूकधारियों ने एक शांत समुदाय पर अचानक से हमला बोल दिया। इस क्रूर और अंधाधुंध हमले में कम से कम 62 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए हैं। नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के राज्य प्रमुख लादान अयुबा के अनुसार, यह खूनी संघर्ष और हमला शुक्रवार को ताराबा राज्य के करीम-लामिडो स्थानीय सरकारी क्षेत्र में स्थित बिनारी समुदाय में हुआ था। इस अमानवीय हमले में 62 लोगों की जान जाने के अलावा 52 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज जारी है। इसके साथ ही इस हिंसा के कारण हजारों स्थानीय निवासियों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन करना पड़ा है।
नदी से बरामद किए गए कई शव और प्रशासनिक मुश्किलें
घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, उत्तरी नाइजीरिया में इस तरह के हमलावरों द्वारा, जिन्हें स्थानीय रूप से 'बैंडिट' या डाकू कहा जाता है, हमले होना एक आम बात बन चुकी है। इस क्षेत्र में ऐसे हथियारबंद समूह सक्रिय हैं जो अक्सर आम और निर्दोष नागरिकों को अपना मुख्य निशाना बनाते हैं। नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी है कि बचाव और खोज अभियान के दौरान अब तक 52 शव बरामद किए जा चुके हैं। इन बरामद किए गए शवों में से 15 शव विशेष रूप से बेनुए नदी से निकाले गए हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने कितनी बेहरमी से लोगों को खदेड़ा था। ताराबा पुलिस के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने इस संबंध में बयान देते हुए कहा कि यह मौत का आंकड़ा अभी पूरी तरह से पक्की या अंतिम संख्या नहीं है, क्योंकि अभी भी और अधिक शव मिलने की पूरी संभावना बनी हुई है। ताराबा पुलिस के प्रवक्ता विक्टर मशेलीज़ाह ने 'द एसोसिएटेड प्रेस' को दिए गए अपने बयान में स्पष्ट किया कि हमारे सुरक्षाकर्मी और राहत दल के लोग अभी भी घटनास्थल पर पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद हैं, और जैसे-जैसे हमें और अधिक शव बरामद होंगे, हम उन्हें भी आधिकारिक तौर पर इस गिनती में निश्चित रूप से शामिल कर लेंगे।
जान बचाने के लिए नदी की तरफ भागे थे ग्रामीण
इस पूरी त्रासदी के पीछे की क्रूरता को स्पष्ट करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल नाइजीरिया के निदेशक ईसा सनुसी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। ईसा सनुसी ने मीडिया को बताया कि हमलावरों ने भौगोलिक स्थिति यानी नदी का पूरा फायदा उठाया और ग्रामीणों को चारों तरफ से घेर लिया। सनुसी ने घटना का विवरण देते हुए कहा कि हुआ यह कि निवासियों को खदेड़कर पानी और नदी की तरफ ले जाया गया; क्रूर डाकुओं के हमलों से अपनी जान बचाने के लिए लाचार लोगों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा और वे सीधे नदी में कूद गए और वर्तमान में नाइजीरिया एक बेहद जटिल और गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में आम नागरिकों पर अक्सर ऐसे हिंसक डाकुओं द्वारा अंधाधुंध हमले किए जाते हैं, जो फिरौती के लिए बड़े पैमाने पर मासूम लोगों का अपहरण करते हैं और इसके अलावा अवैध खदानों पर भी अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं और नाइजीरिया की यह आंतरिक सुरक्षा स्थिति देश की सरकार और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इन डाकुओं और गिरोहों के अलावा देश में बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे कुख्यात इस्लामी चरमपंथी समूह भी सक्रिय हैं जो समय-समय पर ऐसे ही खौफनाक हमलों को अंजाम देते रहते हैं।
उत्तर पश्चिमी नाइजीरिया में 17 किसानों की हत्या
नाइजीरिया में इस तरह की हिंसा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही दुखद खबरें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे ही एक अन्य अलग और दर्दनाक मामले में उत्तर पश्चिमी नाइजीरिया में बंदूकधारियों ने एक अन्य घटना के दौरान 17 किसानों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। किसानों पर हुए इस घातक हमले ने कृषि समुदाय को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था और इस विशेष घटना में 17 किसानों की मौत के अलावा 13 अन्य किसान गंभीर रूप से घायल भी बताए गए थे, जिन्हें तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया था ताकि उनका समय पर इलाज किया जा सके। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बंदूकधारियों ने यह हमला उस वक्त बहुत ही सुनियोजित तरीके से किया था जब ये सभी किसान अपने-अपने खेतों में कड़ी मेहनत कर रहे थे और अपनी आजीविका कमाने में जुटे हुए थे। खेतों में काम कर रहे किसानों पर अचानक हुए इस हमले ने देश में अन्नदाताओं की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। हालांकि, इस सनसनीखेज हमले के बाद भी किसी भी विद्रोही गुट या आतंकवादी संगठन ने इस हमले की आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमलावरों की सही पहचान करना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
What's Your Reaction?