पाकिस्तान में सुरक्षा संकट: PoK और बलूचिस्तान में भारी हिंसा, 7 महीने में 1400 से अधिक मौतें

पाकिस्तान में 1 जनवरी से 16 जुलाई 2026 के बीच 1400 से अधिक लोगों की मौत। PoK, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा चरम पर।

Jul 30, 2026 - 13:35
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पाकिस्तान में सुरक्षा संकट: PoK और बलूचिस्तान में भारी हिंसा, 7 महीने में 1400 से अधिक मौतें

पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जहां पिछले सात महीनों के दौरान हिंसा और आतंकवाद की घटनाओं में भारी वृद्धि देखी गई है और 1 जनवरी से 16 जुलाई 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और बलूचिस्तान में 1400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस अवधि में 600 से अधिक आम नागरिकों और 820 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि हिंसा का यही सिलसिला जारी रहा, तो 2026 के अंत तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 1600 से 1700 जवानों की जान जा सकती है।

जून और जुलाई में हिंसा का तांडव

वर्ष 2026 के जून और जुलाई महीनों के दौरान पाकिस्तान में हिंसा की घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK के रावलाकोट इलाके में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां पाकिस्तानी सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई है और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले 36 घंटों के भीतर ही 35 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है। वहीं, केवल जून और जुलाई के महीनों में कुल 150 से अधिक नागरिकों की मौत की बात सामने आई है।

विभिन्न प्रांतों में सुरक्षा बलों को भारी नुकसान

हिंसा की यह आग केवल PoK तक सीमित नहीं है। खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और पंजाब जैसे प्रांतों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इन क्षेत्रों में आतंकवादी हमलों, घात लगाकर किए गए हमलों और बंधक बनाने जैसी घटनाओं में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उग्रवाद और आतंकवाद की इन घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आंकड़ों में तबाही का मंजर

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 16 जुलाई 2026 के बीच पाकिस्तान में आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़ी 755 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 1400 के पार पहुंच गई है। इसमें 600 से ज्यादा नागरिक और 820 से अधिक सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पाकिस्तान इस समय अपने सबसे खराब सुरक्षा दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि साल के अंत तक सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा 1600 से 1700 तक पहुंच सकता है।

PoK में प्रदर्शन पर भारत का कड़ा रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने PoK में जारी अशांति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट और सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। जायसवाल ने आगे कहा कि PoK में जारी व्यापक प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण, लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं। भारत का यह बयान पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन और प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।

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