यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस में भारी तबाही, वेयरहाउस और ऑयल डिपो पर हमला, 9 की मौत
यूक्रेन ने रूस के वाइल्डबेरीज वेयरहाउस और ऑयल डिपो पर बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसमें 9 लोगों की मौत और 80 से ज्यादा घायल हुए हैं।
यूक्रेन ने रूस की सीमा के भीतर एक बहुत बड़ा ड्रोन हमला किया है, जिससे वहां के कई इलाकों में भारी तबाही मची है। इस हमले में रूस की प्रमुख ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी वाइल्डबेरीज के दो बड़े वेयरहाउस, एक तेल डिपो और कई अन्य सैन्य लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है और रूसी अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन हमलों में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन का दावा है कि ये सभी ठिकाने रूसी सेना की सप्लाई चेन का हिस्सा थे और युद्ध में रसद पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
तांबोव और मॉस्को के वेयरहाउस पर भीषण हमला
पहला बड़ा हमला तांबोव क्षेत्र के कोतोव्स्क में स्थित वाइल्डबेरीज के वेयरहाउस पर हुआ। यह स्थान यूक्रेन की सीमा से लगभग 360 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेरविशोव ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले के समय वेयरहाउस में रात की शिफ्ट का काम चल रहा था। इस हमले में वहां काम कर रहे 7 कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 अन्य लोग घायल हो गए। इस हमले ने रूसी औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरा हमला इलेक्ट्रोस्टाल में हुआ, जो रूस की राजधानी मॉस्को से मात्र 50 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि यहां हुए हमले में 61 लोग घायल हुए हैं। घायलों की स्थिति को देखते हुए उनमें से 40 लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में खबर आई कि अस्पताल में इलाज के दौरान एक घायल व्यक्ति ने दम तोड़ दिया, जिससे इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़ गई।
ऑयल डिपो में आग और नागरिक क्षेत्रों पर प्रभाव
इसी हमले की कड़ी में यूक्रेनी ड्रोन ने नोगिंस्क स्थित एक ऑयल डिपो को भी अपना निशाना बनाया और ड्रोन गिरने के बाद वहां भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने पास में स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल और एक रिहायशी इमारत को तुरंत खाली करा लिया। हमले के दौरान ड्रोन का मलबा एक किंडरगार्टन पर भी गिरा, जिससे वहां आग लग गई, हालांकि बाद में इस पर काबू पा लिया गया। इसके अलावा, शनिवार दोपहर को बेलगोरोद क्षेत्र में हुए एक अन्य ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति की मौत हो गई और 1 व्यक्ति घायल हो गया।
यूक्रेन की सैन्य रणनीति और राष्ट्रपति जेलेंस्की का बयान
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि मॉस्को और तांबोव क्षेत्र के जिन लॉजिस्टिक केंद्रों को निशाना बनाया गया है, वे रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे और उन्होंने दावा किया कि इन केंद्रों का उपयोग रूस ड्रोन और नेविगेशन डिवाइस बनाने के लिए उन विदेशी पुर्जों की सप्लाई के लिए करता था जिन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जेलेंस्की ने यह भी जानकारी दी कि यूक्रेन की स्पेशल आर्मी ने आजोव सागर और रूस के कब्जे वाले अन्य इलाकों में भी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।
यूक्रेनी सेना ने अपने बयान में कहा कि नोगिंस्क का ऑयल डिपो रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति करने का मुख्य केंद्र था। इसके साथ ही यूक्रेन ने ब्लैक सी और आजोव सागर में रूस के दो टैंकरों, दो फ्लोटिंग क्रेन और एक टगबोट को भी निशाना बनाने का दावा किया है। केर्च में प्रोजेक्ट 10410 स्वेतल्याक श्रेणी के एक गश्ती जहाज पर भी हमला किया गया। कब्जे वाले लुहांस्क क्षेत्र में साबिवका के पास बिला नदी पर बने एक रेलवे पुल को भी नष्ट करने की कोशिश की गई, जिसका उपयोग रूस अपने हथियारों और सैन्य साजो-सामान को लाने-ले जाने के लिए करता था।
रूस का रक्षात्मक दावा
रूस के रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने रातभर में 19 अलग-अलग क्षेत्रों, क्रीमिया, आजोव सागर और ब्लैक सी के ऊपर कुल 379 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, रूस ने यह भी स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन गिराने के बावजूद कुछ ड्रोन अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे वेयरहाउस, तेल डिपो और परिवहन ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है।
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