यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, प्रियंका गांधी ने की बैठक

दिल्ली रैली के बाद कांग्रेस ने यूपी चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। प्रियंका गांधी ने मंगलवार को बैठक कर चुनावी रणनीति पर मंथन किया।

Nov 4, 2026 - 10:35
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यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, प्रियंका गांधी ने की बैठक

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। राज्य में साल 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं और अपनी रणनीति को अंतिम रूप देकर जमीन पर प्रचार अभियानों में जुट चुके हैं। इसी कड़ी में अब मुख्य विपक्षी दलों में शामिल कांग्रेस पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी तैयारियों को बहुत तेज कर दिया है। दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुई पार्टी की एक बड़ी रैली के ठीक बाद अब कांग्रेस का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों पर केंद्रित हो गया है। इसी राजनीतिक क्रम को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने मंगलवार को अपने दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक बेहद अहम बैठक की और आगामी चुनावी रणनीति पर गहन मंथन किया है।

तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक

मंगलवार को दिल्ली में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित की गई यह बैठक काफी लंबी चली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ अपने आवास पर करीब 3 घंटे तक लंबी मैराथन बैठक की। इस लंबी बैठक के दौरान प्रदेश कांग्रेस संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन, बूथ स्तर तक की तैयारियों को चाक-चौबंद करने और राज्यभर में पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत बनाने पर रहा। पार्टी के रणनीतिकारों ने माना कि जब तक बूथ स्तर पर संगठन मजबूत नहीं होगा, तब तक चुनाव में बेहतर नतीजे हासिल करना मुमकिन नहीं है। इसलिए बूथ प्रबंधन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि पार्टी कैडर को पूरी तरह से सक्रिय किया जा सके।

गठबंधन और सीट शेयरिंग पर भी हुई चर्चा

प्रियंका गांधी के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण तीन घंटे की बैठक में केवल संगठनात्मक ढांचे तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी खुलकर बात हुई। सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के फार्मूले को लेकर भी बहुत गंभीरता से बातचीत की गई है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विपक्षी गठबंधन आने वाले समय में किस तरह से चुनाव लड़ेगा। कांग्रेस पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सीटों के बंटवारे को लेकर समय रहते स्थिति स्पष्ट हो जाए ताकि किसी भी प्रकार की आंतरिक खींचतान से बचा जा सके और पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरा जा सके और बैठक में मौजूद नेताओं ने अपने-अपने इलाकों के राजनीतिक हालात और जमीनी फीडबैक से प्रियंका गांधी को अवगत कराया।

अखिलेश यादव का बड़ा चुनावी ऐलान

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक अन्य प्रमुख घटनाक्रम के तहत मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि वह आगामी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। अपने इस फैसले के पीछे का तर्क देते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा है कि वह पिछली बार भी बिना विधानसभा चुनाव लड़े ही प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी वह लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए पहुंचेंगे। अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा है कि हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब हम चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए हम वही करेंगे जो हमारे लिए सबसे ज्यादा शुभ और फायदेमंद साबित हो। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं।

चुनावी माहौल और कांग्रेस की रणनीति

दिल्ली की हालिया रैली के बाद कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के मोर्चे पर अपनी गतिविधियों को तेज किया है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि पार्टी राज्य में अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में हुई इस लंबी बैठक के माध्यम से पार्टी ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में पूरी गंभीरता के साथ उतरने के लिए तैयार है। संगठन के पुनर्गठन से लेकर गठबंधन की संभावनाओं तक, हर मोर्चे पर पार्टी हाईकमान खुद सीधी नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के इस अभियान और बैठकों का सिलसिला और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।

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