डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों रोका: कूटनीति और होर्मुज स्ट्रेट खोलने की कोशिशें तेज
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमला रोककर कूटनीति को मौका दिया है। जानें होर्मुज स्ट्रेट और नए शांति प्रस्ताव से जुड़ी पूरी जानकारी।
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़े सैन्य हमले को बिल्कुल आखिरी समय में रोककर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभियान होने वाला था। इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे कई गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक कारण छिपे हुए हैं, जिन्होंने युद्ध की कगार पर खड़ी स्थिति को फिलहाल बातचीत की मेज पर ला खड़ा किया है। ट्रंप का यह कदम न केवल सैन्य रणनीति का हिस्सा है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने की एक बड़ी कोशिश भी मानी जा रही है।
कूटनीति और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की कोशिश
ट्रंप ने यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने ईरान पर हमले को इसलिए रद्द किया ताकि युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक बातचीत को थोड़ा और समय दिया जा सके। इस निर्णय का एक सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करना है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप द्वारा हमले को रद्द करने के फैसले से पहले ही ईरान ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए कुछ रियायतें देने को तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कतरी और अमेरिकी राजनयिकों के साथ बातचीत में संकेत दिया है कि तेहरान होर्मुज पर समझौता करने के लिए तैयार हो सकता है और इस संभावित समझौते के तहत जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से प्रवेश करने और ओमान के रास्ते बाहर निकलने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यह भी स्पष्ट किया है कि मस्कट के साथ सुरक्षित समुद्री नेविगेशन पर चर्चा चल रही है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट किसी भी स्थिति में 28 फरवरी की युद्ध पूर्व स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।
शांति का नया और व्यापक प्रस्ताव
हमला रुकने के बाद एक नया शांति प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में आ गया है। यह प्रस्ताव केवल परमाणु वार्ता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं। इस नए प्रस्ताव के तहत होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और इराक तथा जॉर्डन में ईरान समर्थित गुटों द्वारा किए जा रहे हमलों को रोकना अनिवार्य शर्त है। इसके बदले में, अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करेगा और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल निर्यात करने की अनुमति प्रदान करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी जानकारी दी है कि सोमवार दोपहर से ईरान के साथ बातचीत का दौर फिर से शुरू हो रहा है, जो इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
ईरान के लिए आखिरी चेतावनी और सैन्य दबाव
भले ही अमेरिका ने फिलहाल अपने हमले रोक दिए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सैन्य कार्रवाई का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। रिपब्लिकन सीनेटर जिम बैंक्स के अनुसार, ट्रंप अभी भी एक शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में हैं, लेकिन उन्होंने ईरान को यह आखिरी मौका दिया है। वाशिंगटन का रुख स्पष्ट है कि यदि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद नहीं करता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो अमेरिका फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले करने के लिए तैयार है। इस बीच, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य विश्लेषकों से गैर-परंपरागत तरीकों के सुझाव मांगे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर अमेरिका सख्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
खाड़ी देशों का रुख और ईरान की आंतरिक स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम में खाड़ी देशों की भूमिका और ईरान की आंतरिक स्थिति ने भी ट्रंप के फैसले को प्रभावित किया है और वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों में इस मुद्दे पर मतभेद हैं। जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका से ईरान के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाने की मांग की है, वहीं सऊदी अरब लगातार तनाव को कम करने और शांति बनाए रखने पर जोर दे रहा है। इसके अतिरिक्त, ट्रंप का यह फैसला ईरान की बिगड़ती आंतरिक स्थिति को देखते हुए भी लिया गया हो सकता है। ईरान वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, और पानी-बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे वहां की जनता में भारी आक्रोश है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों के कारण ईरान में कभी भी विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है और ट्रंप ने फिलहाल कूटनीति को मौका देकर और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने की कोशिश करके ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
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