वेस्ट एशिया में युद्ध की आहट: ईरान ने कुवैत और इराक के तेल ठिकानों पर किया हमला
ईरान ने कुवैत और इराक में अमेरिकी ठिकानों और तेल क्षेत्रों पर ड्रोन हमले किए हैं। ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों की हिट लिस्ट जारी की है।
युद्ध की आग की तपिश, जिसने कभी पूरी दुनिया को झुलसा दिया था, एक बार फिर पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्र में महसूस की जा रही है। कुछ समय की शांति के बाद, यह पूरा इलाका एक बार फिर धमाकों की गूंज से दहल उठा है। जमीन, हवा और समुद्र में विनाशकारी हथियारों के साथ ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन चल रहा है। इस युद्ध के मैदान में एक तरफ अमेरिका खड़ा है और दूसरी तरफ ईरान, लेकिन इस टकराव की सबसे बड़ी कीमत खाड़ी देशों को चुकानी पड़ रही है। वर्तमान स्थिति में कुवैत को इसके सबसे बुरे और विनाशकारी नतीजों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तरी कुवैत में रणनीतिक ठिकानों पर हमले
ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों को अपना निशाना बना रहा है, जिसके जवाब में कुवैत को अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से एक्टिवेट करना पड़ा है ताकि ड्रोन हमलों का मुकाबला किया जा सके। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईरान ने उत्तरी कुवैत में कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक जगहों को निशाना बनाया है। इनमें कैंप उदैरी, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बुबियन द्वीप और अली अल सलेम एयरबेस शामिल हैं और ये वही सैन्य ठिकाने हैं जहां अमेरिकी सेना के पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अत्याधुनिक सिस्टमों को ईरान के कामिकेज ड्रोन ने निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया है।
इराक के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी प्रहार
यह संघर्ष केवल कुवैत तक ही सीमित नहीं है। इराक में भी ईरान की ओर से भीषण हमले किए जा रहे हैं और इराक के अल अहदाब ऑयल फील्ड में ईरान ने विनाशकारी ड्रोन से हमले को अंजाम दिया है। इस हमले के कारण ऑयल रिफाइनरी भीषण आग की चपेट में आ गई और धधकने लगी। इराक पर हुए इन हमलों से ईरान के इरादे पूरी तरह स्पष्ट हो जाते हैं। ईरान ने एरबिल में भी ड्रोन से हमला किया, जिससे एक ऑयल डिपो धुएं के गुबार से भर गया। इसके अलावा शमामिक में स्थित शमाक रिफाइनरी को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। यह संदेश साफ है कि ईरान क्षेत्र के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर आर्थिक चोट पहुंचाना चाहता है।
ईरान की हिट लिस्ट और भविष्य की चेतावनी
ईरान का दावा है कि अब तक की उसकी सैन्य कार्रवाइयां असल जंग का सिर्फ एक ट्रेलर थीं और पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है। इसी कड़ी में ईरान ने उन ठिकानों की एक विस्तृत सूची जारी की है जिन पर वह सबसे पहले हमला करने की योजना बना रहा है। ये सभी स्थान ईरानी मिसाइलों की मारक क्षमता के भीतर आते हैं।
ईरान की सीधी धमकी और क्षेत्रीय प्रभाव
ईरान ने एक सीधी और गंभीर धमकी दी है कि अगर उसकी साउथ पार्स गैस फैसिलिटी पर कोई भी हमला हुआ, तो वह तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में स्थित रास लाफान LNG फैसिलिटी को पूरी तरह तबाह कर देगा। ईरान का यह आक्रामक रुख केवल बयानों तक सीमित नहीं है और कुवैत और इराक के अलावा, ईरान ने जॉर्डन पर मिसाइल हमले किए हैं और ओमान के तट के पास महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर जहाजों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का उपयोग किया है। इसके साथ ही, ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही भी लाल सागर (Red Sea) में सक्रिय हो गए हैं, जिसके कारण सऊदी अरब के तेल टैंकरों को अपने रास्ते बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अमेरिकी जवाबी कार्रवाई की संभावना
इराक में स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक बिगड़ने की आशंका जताई है और इस बीच, ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की तैयारी की खबरें भी तेज हो गई हैं। सीबीएस न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के पावर ग्रिड और तेल बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले कर सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप की रणनीतियां ईरान को पीछे हटने पर मजबूर करेंगी या पश्चिम एशिया एक और लंबे और विनाशकारी युद्ध की आग में झुलस जाएगा।
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