दिल्ली ईवी पॉलिसी: 2028 तक पेट्रोल टू-व्हीलर पर लग सकती है रोक

दिल्ली सरकार 2028 तक पेट्रोल टू-व्हीलर और 2027 तक थ्री-व्हीलर पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। जानें इसका ऑटो शेयरों पर असर।

Apr 12, 2026 - 10:35
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दिल्ली ईवी पॉलिसी: 2028 तक पेट्रोल टू-व्हीलर पर लग सकती है रोक

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण को नियंत्रित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई 'ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2026-30' का मसौदा सार्वजनिक किया है। इस नीति के तहत सरकार ने पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए एक सख्त समयसीमा का प्रस्ताव रखा है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य दिल्ली की सड़कों पर शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों की संख्या में वृद्धि करना है। इस नीतिगत बदलाव का सीधा प्रभाव ऑटोमोबाइल क्षेत्र और संबंधित सहायक उद्योगों से जुड़ी कंपनियों पर पड़ने की संभावना है।

पेट्रोल वाहनों को हटाने की प्रस्तावित समयसीमा

दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए गए मसौदे के अनुसार, जनवरी 2027 से दिल्ली में किसी भी नए पेट्रोल से चलने वाले तिपहिया (थ्री-व्हीलर) वाहन का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इसके बाद, अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर भी पूरी तरह से रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकार ने इस मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो दिल्ली में नए पेट्रोल वाहनों की बिक्री पूरी तरह से बंद हो जाएगी और केवल इलेक्ट्रिक या अन्य वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को ही अनुमति मिलेगी।

प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माताओं पर नीति का असर

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस नीतिगत बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव उन कंपनियों पर पड़ेगा जो वर्तमान में इलेक्ट्रिक सेगमेंट में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं और बजाज ऑटो ने इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार में अपनी स्थिति सुदृढ़ की है। 29% की बढ़त के साथ ₹9,830 पर बंद हुआ था। इसी तरह, टीवीएस मोटर कंपनी भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरी है। 64% की तेजी के साथ ₹3,825 पर बंद हुआ। इन कंपनियों के पोर्टफोलियो में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए बाजार में इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप्स की बाजार में स्थिति

शुद्ध रूप से इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों जैसे ओला इलेक्ट्रिक और एथर एनर्जी के लिए यह नीतिगत बदलाव एक बड़े बाजार आधार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है और ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में हाल के दिनों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा गया है। 88 पर बंद हुआ था। वहीं, एथर एनर्जी ने भी पिछले एक सप्ताह में 11% से अधिक की मजबूती दर्ज की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता दर देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक रही है, जिससे इन स्टार्टअप्स को अपने परिचालन विस्तार में मदद मिल सकती है।

बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास

इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए बैटरी निर्माताओं और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक्साइड इंडस्ट्रीज और अमारा राजा एनर्जी जैसी कंपनियां बैटरी तकनीक में निवेश बढ़ा रही हैं और 74% की वृद्धि के साथ ₹326 पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त, टाटा पावर जैसी कंपनियां जो चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, उनके प्रदर्शन पर भी नीति का प्रभाव देखा जा सकता है। 50 पर बंद हुआ था।

शेयर बाजार में संबंधित कंपनियों का प्रदर्शन

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली सरकार की इस प्रस्तावित नीति का असर सोमवार को बाजार खुलने पर संबंधित ऑटो और सहायक शेयरों में देखने को मिल सकता है। पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान ईवी सेक्टर से जुड़ी अधिकांश कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। सोना बीएलडब्ल्यू और अन्य कंपोनेंट निर्माता भी इस बदलाव के केंद्र में हैं। नीति के अंतिम कार्यान्वयन और सरकार द्वारा दी जाने वाली संभावित सब्सिडी या प्रोत्साहनों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। वर्तमान में, निवेशक इन कंपनियों के तिमाही परिणामों और भविष्य की उत्पादन क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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