पाकिस्तान का अफगानिस्तान सीमा पर बड़ा हमला: कराची हमले के बाद 30 की मौत

कराची रेंजर्स मुख्यालय पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर सैन्य कार्रवाई की, जिसमें 30 लोग मारे गए। जमात-उल-अहरार ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

Jun 29, 2026 - 09:35
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पाकिस्तान का अफगानिस्तान सीमा पर बड़ा हमला: कराची हमले के बाद 30 की मौत

पाकिस्तान ने अपनी सीमाओं के भीतर बढ़ते आतंकी हमलों के जवाब में अफगानिस्तान सीमा पर सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को पाकिस्तानी सेना ने सीमा के पास एक बड़ा अभियान चलाया जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई हाल के दिनों में पाकिस्तान में हुई कई आतंकी घटनाओं का सीधा परिणाम है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने जानकारी दी कि सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनी और हवाई हमले किए हैं। यह अभियान पूरी तरह से योजनाबद्ध था ताकि आतंकी ठिकानों को नष्ट किया जा सके और भविष्य के खतरों को कम किया जा सके।

कराची रेंजर्स मुख्यालय पर हमले का जवाब

सूचना मंत्री के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और विशेष रूप से कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के कैंप पर हुए हमलों के बाद की गई है। शनिवार की रात कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर आतंकियों ने हमला किया था। सिंध पुलिस प्रमुख जावेद आलम ओधो ने बताया कि आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को मुख्यालय के मुख्य गेट से टकराने की कोशिश की और इसके तुरंत बाद वहां भारी गोलीबारी शुरू हो गई। शुरुआती जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वाहन में रखा गया विस्फोटक फटा था या नहीं, लेकिन हमले की योजना सुरक्षा बलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने की थी।

हताहतों का विवरण और सुरक्षा अभियान

कराची में हुए इस हमले के दौरान तीन पाकिस्तानी अर्धसैनिक बल के जवान और तीन आतंकवादी मारे गए और इस संघर्ष में एक जवान के पैर में गोली लगी, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले के तुरंत बाद स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (एसएसयू), एंटी-टेररिस्ट फोर्स (एटीएफ), रेंजर्स और पुलिस की भारी टुकड़ियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। सुरक्षा बलों ने इलाके में सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया ताकि किसी भी अन्य संभावित खतरे को टाला जा सके। रेस्क्यू 1122 सिंध की टीमों ने भी मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में हिस्सा लिया और घायलों की सहायता की।

जमात-उल-अहरार ने ली हमले की जिम्मेदारी

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है। यह संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का ही एक अलग हुआ गुट है। संगठन ने दावा किया है कि इस हमले में उनके 9 आतंकियों ने हिस्सा लिया था। इस दावे के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सुरक्षा संबंधी तनाव और अधिक बढ़ गया है और पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन अपने नागरिकों और सुरक्षा बलों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा पर तनाव के कारण

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में पुलिस और सुरक्षा बलों पर होने वाले हमलों में तेजी आई है। पाकिस्तान सरकार का मानना है कि इन हमलों के पीछे टीटीपी और उससे जुड़े अन्य संगठनों का हाथ है। हालांकि टीटीपी और अफगान तालिबान अलग-अलग संगठन हैं, लेकिन उन्हें एक-दूसरे का सहयोगी माना जाता है। 2021 में जब से अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी हुई है, तब से सीमा पर संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान सरकार टीटीपी के आतंकियों को शरण देती है, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है।

10 जून की हवाई कार्रवाई और पिछला घटनाक्रम

सीमा पर जारी यह संघर्ष नया नहीं है और इससे पहले 10 जून को भी अफगानिस्तान ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए थे। अफगानिस्तान के अनुसार, उन हमलों में 13 लोगों की जान गई थी, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल थे। हालांकि, पाकिस्तान ने इन दावों को नकारते हुए कहा था कि उसने किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया है। पाकिस्तान के मुताबिक, उस कार्रवाई में केवल आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिसमें 26 आतंकवादी मारे गए थे। फरवरी से अब तक दोनों देशों के बीच कई बार जवाबी सैन्य कार्रवाइयां हो चुकी हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ता के कई दौर होने के बावजूद अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

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