मॉनसून की सुस्ती पर सरकार का एक्शन प्लान, पीएम मोदी ने 10 मंत्रालयों को किया अलर्ट
पीएम मोदी ने मॉनसून की सुस्ती से निपटने के लिए 10 मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं। जून में 43 फीसदी कम बारिश के बाद 12 राज्यों के 315 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।
केंद्र सरकार ने मॉनसून की धीमी गति से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मॉनसून की सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त की और विभिन्न मंत्रालयों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए और इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण जून के महीने में बारिश काफी कम हुई है, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मॉनसून की सुस्ती का असर आम जनजीवन पर नहीं पड़ने दिया जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।
12 वर्षों में सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून के महीने में पिछले 12 वर्षों की तुलना में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। अब तक औसत से 43 फीसदी कम बारिश हुई है, जो एक गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के महीने में भी बारिश औसत से कम रहने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। बारिश की कमी का सीधा असर फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है, जिसे लेकर सरकार पूरी तरह सजग है।
10 मंत्रालयों को विशेष जिम्मेदारी
मॉनसून की इस सुस्ती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने 10 प्रमुख मंत्रालयों और विभागों को सक्रिय कर दिया है। इनमें कृषि, खाद्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, ऊर्जा, जलशक्ति, पशुपालन, डेयरी, गृह और वित्त मंत्रालय शामिल हैं। इन सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दें ताकि किसानों और ग्रामीण आबादी को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। सरकार का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है और मंत्रालयों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।
12 राज्यों के 315 जिलों में संकट
कमजोर मॉनसून का सबसे अधिक असर देश के 12 राज्यों पर पड़ता दिख रहा है। कृषि मंत्री के अनुसार, देश के 315 जिलों में कमजोर मॉनसून के कारण चुनौतियां पैदा हो गई हैं। इनमें से 111 जिले ऐसे हैं जहां सिंचाई की उपलब्धता 25 फीसदी से भी कम है। प्रभावित होने वाले राज्यों की सूची में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु शामिल हैं। इन राज्यों में फसलों की बुवाई और पैदावार पर पड़ने वाले असर की बारीकी से निगरानी की जा रही है ताकि समय रहते राहत पहुंचाई जा सके।
ग्रामीण रोजगार और मजदूरी दरों में बदलाव
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार वीबी जी राम जी (ग्रामीण रोजगार मिशन) के बजट में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। वर्तमान में इस मिशन का बजट 95000 करोड़ है। 1 जुलाई से लागू नए नियमों के अनुसार, मजदूरी की दर 300 से 409 रुपये के बीच तय की गई है। वहीं, सिक्किम की कुछ पंचायतों में 450 रुपये की विशेष मजदूरी दर लागू है। सरकार की योजना है कि यदि मॉनसून की स्थिति और खराब होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक कार्य दिवस सृजित किए जाएं ताकि लोगों की आय प्रभावित न हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके।
बिजली उत्पादन और जलाशयों की निगरानी
सरकार जलाशयों के जलस्तर पर भी निरंतर नजर रख रही है। जलाशयों में पानी की कमी का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। जलशक्ति और ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वे पानी के भंडारण और उसके कुशल उपयोग की योजना बनाएं। यदि जलविद्युत उत्पादन में कमी आती है, तो सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी भी कर ली है ताकि देश में बिजली की आपूर्ति बाधित न हो। सरकार का प्रयास है कि सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए पानी की कमी न हो और बिजली का संकट भी पैदा न हो।
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