अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का अमेरिका ने किया समर्थन, आत्मरक्षा का दिया हवाला

अमेरिका ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक का समर्थन करते हुए इसे आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। इस हमले में 28 लोगों की मौत हुई है।

Jul 3, 2026 - 11:35
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अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का अमेरिका ने किया समर्थन, आत्मरक्षा का दिया हवाला

संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगानिस्तान की धरती पर पाकिस्तान द्वारा की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अमेरिका आतंकवादी हमलों से खुद को बचाने के पाकिस्तान के अधिकार का पूरी तरह समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस हफ्ते 27 जून को अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक में लगभग 28 लोगों की जान चली गई है। इस समर्थन ने क्षेत्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और काबुल के पलटवार को अमेरिका ने आतंकी हमले की श्रेणी में रखा है।

हवाई हमले और हताहतों का विवरण

संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को इस संबंध में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। यूएन के अनुसार, अफगानिस्तान के साथ लगती सीमा पर पाकिस्तान की ओर से 27 जून को की गई एयरस्ट्राइक में कम से कम 28 आम नागरिक मारे गए और 49 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान ने यह सैन्य कार्रवाई कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर हुए हमले के जवाब में की थी, जिसमें 3 पाकिस्तानी जवान शहीद हो गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े गुट 'जमात-उल-अहरार' को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए सीमा पार हमले किए।

संघर्ष का पुराना इतिहास और वर्तमान स्थिति

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हिंसक झड़पों का सिलसिला काफी समय से रुक-रुक कर जारी है। फरवरी के महीने में दोनों देशों के बीच भयंकर संघर्ष छिड़ गया था। 21 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पकतीका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में अफगान सेना ने भी पाकिस्तान पर जवाबी हमले शुरू कर दिए थे और तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 27 जून के हमले के बाद अफगानिस्तान के तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी इलाके में एयरस्ट्राइक की है। वहीं, इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में चार शुरुआती ड्रोन को रोककर मार गिराया और इसके बाद अफगानिस्तान के तीन प्रांतों पक्तिया, पक्तिका और कुनार में हवाई हमले कर तालिबान के हथियारों और गोला-बारूद के भंडारों को नष्ट कर दिया।

वाशिंगटन का रुख और कूटनीतिक संबंध

वाशिंगटन द्वारा पाकिस्तान की तरफदारी करने के गहरे कूटनीतिक मायने हैं। अमेरिका का यह कहना कि वह पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है, यह दर्शाता है कि वाशिंगटन अफगान तालिबान को एक आतंकवादी समूह के रूप में देखता है। पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका का एक बड़ा नॉन-NATO सहयोगी रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद से वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच रिश्तों में काफी सुधार देखा गया है और इसके अलावा, पाकिस्तान ने ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध की स्थितियों को सुलझाने में एक बिचौलिये की भूमिका भी निभाई है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और तालिबान ने पाकिस्तान के हमले का बदला लेने की कसम खाई है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस्लामाबाद लगातार अफगानिस्तान पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह उन उग्रवादियों को पनाह देता है जो पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। पाकिस्तान का मानना है कि उसकी सुरक्षा के लिए ये पनाहगाहें बड़ा खतरा हैं और दूसरी ओर, अफगान तालिबान इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। तालिबान का कहना है कि उग्रवाद पाकिस्तान की अपनी अंदरूनी समस्या है और पाकिस्तान अपनी सुरक्षा विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है। इस खींचतान के बीच सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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