भारत समेत चार देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मिली बड़ी छूट

ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की छूट दी है। जानिए क्या है पूरी खबर।

Nov 4, 2026 - 18:35
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भारत समेत चार देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मिली बड़ी छूट

ईरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्ग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत समेत चार चुनिंदा देशों के कमर्शियल शिप्स को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की विशेष छूट देने का बड़ा फैसला किया है। इस बात की आधिकारिक जानकारी ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोगद्दम ने दी है, जिससे वैश्विक व्यापार जगत में एक नया मोड़ आया है।

ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज़ एजेंसी यानी ISNA को दिए गए एक विस्तृत इंटरव्यू में अमीर हयात-मोगद्दाम ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को वर्तमान में ट्रांज़िट पाबंदियों से छूट प्रदान की गई है। उन्होंने अपने बयान में विस्तार से बताते हुए कहा कि हमने अभी भारत, चीन, इराक और कतर को होर्मुज स्ट्रेट में ट्रांज़िट पाबंदियों से छूट दी है। इन देशों के जहाज़ आसानी से गुज़रते हैं, और अमेरिकी भी उन्हें रोकते नहीं हैं। इस बयान से साफ होता है कि यह कदम भू-राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

अमीर हयात-मोगद्दाम ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि यह विशेष छूट पूरी तरह से ईरान की डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक ज़रूरतों से जुड़ी हुई हैं। कूटनीतिक और आर्थिक आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए ईरान ने इन देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने विशेष तौर पर उल्लेख किया कि भारतीय जहाजों के लिए यह खास इंतज़ाम भारत से दवाओं के इम्पोर्ट को आसान बनाने के लिए किया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या आवश्यक आपूर्ति में कोई बाधा उत्पन्न न हो सके।

दूसरी ओर, चीनी जहाजों को दी गई छूट के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि चीनी जहाजों के लिए छूट का मकसद बीजिंग का पॉलिटिकल सपोर्ट हासिल करना था। इस प्रकार ईरान ने कूटनीतिक लाभ और आर्थिक आवश्यकताओं के तहत अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है।

भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांज़िट फीस की वसूली

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए ईरान की वित्तीय नीतियां भी स्पष्ट की गई हैं और अमीर हयात-मोघद्दाम ने जानकारी दी कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल करने वाले भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांज़िट फीस वसूलता है। हालांकि, इसके विपरीत कतर के जहाजों को पूरी तरह से बिना किसी चार्ज के इस समुद्री मार्ग से गुजरने की विशेष इजाज़त दी गई है, जो कतर और ईरान के बीच के आपसी संबंधों और क्षेत्रीय व्यवस्था को दर्शाता है।

ईरान की ओर से उठाया गया यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने को लेकर मर्चेंट शिपिंग पर विभिन्न प्रकार की कड़ी पाबंदियां लगी हुई हैं। जानकारी के लिए बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से आपस में जोड़ने का काम करता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए एक प्रमुख धमनी है।

इस बीच, यूरोपियन यूनियन ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC नेवी ने एक विशेष सिस्टम शुरू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को अपनी आवाजाही की इजाज़त लेने के लिए अपने कार्गो और डेस्टिनेशन के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही जहाजों को अपनी पहचान की जानकारी भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी, जिसके बाद ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

भारत के लिए क्यों बेहद ज़रूरी है होर्मुज स्ट्रेट?

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सामरिक महत्व अत्यधिक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। आंकड़े बताते हैं कि भारत अपने इस्तेमाल का लगभग नब्बे प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से इम्पोर्ट करता है, और वर्तमान समय में भी लगभग तीस प्रतिशत इम्पोर्ट इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से होकर भारत पहुंचता है।

ऐतिहासिक रूप से देखें तो पहले भारत इस समुद्री रास्ते पर बहुत ज़्यादा निर्भर हुआ करता था और एक वक्त ऐसा भी था जब भारत का लगभग सत्तर प्रतिशत कच्चा तेल इसी महत्वपूर्ण रास्ते से होकर देश में आता था। हालांकि, समय के साथ भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने सप्लाई सोर्स को अलग-अलग स्रोतों में विविधतापूर्ण बनाया है, फिर भी होर्मुज स्ट्रेट का महत्व भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज भी उतना ही बना हुआ है।

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