खामेनेई की अमेरिका को चेतावनी, ट्रंप की हार से गलतफहमी न पालें ईरान तैयार
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद चेतावनी दी है कि अमेरिकी रवैया नहीं बदलेगा और हमला होने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी हार के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया उबाल देखने को मिल रहा है। इस हार के बाद ईरान ने अमेरिका के रवैये में किसी भी तरह के सकारात्मक बदलाव की उम्मीद करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने बुधवार को अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को मिली हार के बाद एक तीखा बयान दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान पर कोई नया सैन्य हमला होता है, तो ईरान इसका पहले से कहीं अधिक कड़ा जवाब देगा और आक्रामक ताकतों को छोड़ेगा नहीं।
मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद ईरान ने अपने तीखे बयानों को और अधिक तेज कर दिया है। मुजतबा खामेनेई ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ईरान सभी क्षेत्रों में खुद को लगातार मजबूत करना जारी रखेगा, ताकि वह दुनिया के किसी भी देश या ताकतों के किसी भी तरह के हमले का डटकर सामना कर सके। अमेरिकी चुनावों के इन परिणामों ने घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, और तेहरान ने इस स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है।
किसी तरह की गलतफहमी ना पालें
ईरानी नेता ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के प्रति अमेरिका का शत्रुतापूर्ण रवैया किसी भी कीमत पर नहीं बदलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे अमेरिका में ट्रंप हारें या जीतें, वहां किसी भी राजनीतिक दल की सरकार आ जाए, या फिर ईरान की तरफ से कोई भी रियायत क्यों न दे दी जाए, अमेरिकी नीतियों का मूल स्वरूप शत्रुतापूर्ण ही रहेगा। मुजतबा खामेनेई ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया और चेतावनी दी कि वे किसी भी तरह की गलतफहमी ना पालें जो मध्यावधि चुनावों के इन परिणामों के बाद अमेरिकी नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने अमेरिकी वैश्विक प्रभुत्व में लगातार आ रही गिरावट का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उनका यह साफ तर्क था कि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत और अपना अंतरराष्ट्रीय प्रभाव तेजी से खो रहा है। मुजतबा खामेनेई ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के अपने ही अदूरदर्शी कदमों ने उसकी ताकत के कम होने की इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक तेज कर दिया है।
अमेरिकी कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण
इस बीच, मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है, जो राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ है और खुद ट्रम्प ने भी यह माना है कि युद्ध और उसके कारण पेट्रोल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने रिपब्लिकन पार्टी की इस हार में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। फॉक्स न्यूज़ को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुलकर स्वीकार किया और कहा कि मुझे लगता है कि इसमें ईरान का भी कुछ हाथ था। उन्होंने आगे यह भी कहा कि हालांकि मतदाता तेहरान के खिलाफ उठाए गए उनके कदमों से पूरी तरह से सहमत थे, लेकिन वे शायद ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण उत्पन्न होने वाले अल्पकालिक आर्थिक नतीजों और दबावों के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थे। ट्रम्प ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि मैं इस बात को पूरी तरह से समझता हूं।
ट्रम्प का ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस बातचीत के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें फरवरी में ईरान के खिलाफ इज़रायल के साथ मिलकर संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करने का बिल्कुल भी कोई पछतावा नहीं है। सीबीएस न्यूज़ से एक अन्य अलग साक्षात्कार में बात करते हुए, ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह संघर्ष और तनाव तब खत्म होगा जब वह खुद कहेंगे कि यह अब खत्म हो चुका है। इन तमाम बयानों और राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों और अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की ढील न देने का संकल्प लिया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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