आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसा: नौसेना के दो अधिकारियों का होगा कोर्ट मार्शल
भारतीय नौसेना ने युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र के पलटने की घटना में दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जानिए पूरी खबर विस्तार से।
भारतीय नौसेना द्वारा अपने दो वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एक बहुत ही गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी कदम उठाते हुए कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पूरी कार्रवाई मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में घटी उस दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर घटना के संबंध में की जा रही है जिसमें भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र दुर्घटना का शिकार होकर पलट गया था। इस घटना के करीब दो साल बीत जाने के बाद अब नौसेना ने इस बड़े मामले में औपचारिक रूप से कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे सैन्य बलों में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर एक कड़ा संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों पर लगे गंभीर लापरवाही के आरोप
इस पूरे मामले में जिन दो अधिकारियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर यानी कैप्टन और ऑफिसर ऑफ द डे यानी लेफ्टिनेंट कमांडर शामिल हैं। नौसेना की आंतरिक जांच और शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर इन दोनों अधिकारियों पर अपनी ड्यूटी और दायित्वों के निर्वहन के दौरान भारी लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर यानी कैप्टन पर एक अतिरिक्त और बेहद गंभीर आरोप भी तय किया गया है, जिसके तहत उन्हें युद्धपोत को गंभीर खतरे में डालने यानी हेजर्डिंग ए नवल वेसल का दोषी माना जा रहा है। सैन्य नियमों और नौसेना की न्याय प्रणाली के तहत यह आरोप बेहद गंभीर श्रेणी में आते हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन अधिकारियों के खिलाफ अब कोर्ट मार्शल की विधिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जुलाई 2024 की वह घटना और उसके कारण
यह पूरा घटनाक्रम 21 जुलाई 2024 का है, जब महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के सुरक्षित माने जाने वाले नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत और मेंटेनेंस का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र में आग लगने की एक अचानक दुर्घटना सामने आई। युद्धपोत के भीतरी हिस्से में लगी इस आग पर काबू पाने के लिए और इसे फैलने से रोकने के लिए वहां तैनात कर्मियों द्वारा जहाज के भीतर बड़ी मात्रा में पानी का छिड़काव किया गया। आग बुझाने के इस अत्यधिक प्रयास के दौरान जहाज के अंदर भारी मात्रा में पानी भर गया, जिसके परिणामस्वरूप युद्धपोत का आंतरिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया। पानी के अत्यधिक भार और असंतुलन के कारण युद्धपोत अचानक पोर्ट साइड की ओर यानी एक तरफ झुक गया और देखते ही देखते पलट गया।
एक नाविक की असामयिक मौत और रेस्क्यू ऑपरेशन
इस भयानक हादसे ने नौसेना को झकझोर कर रख दिया था, क्योंकि इस दुर्घटना के दौरान लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की जान चली गई थी। मुख्य नाविक सितेंद्र सिंह की इस घटना में मौत ने पूरे सैन्य महकमे को शोक में डुबो दिया था। हादसे के वक्त मची अफरा-तफरी के बीच कई नौसैनिकों ने तो सूझबूझ दिखाते हुए गैंगवे के जरिए सुरक्षित बाहर निकलने में सफलता प्राप्त की थी, परंतु कई अन्य नौसैनिकों को अपनी जान बचाने के लिए मजबूरन समुद्र के ठंडे पानी में छलांग लगानी पड़ी थी। घटना के तुरंत बाद नौसेना द्वारा एक बेहद व्यापक और गहन खोज अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरुप मुख्य नाविक सितेंद्र सिंह का शव अथक प्रयासों के बाद बरामद किया जा सका था।
युद्धपोत का संतुलन बिगड़ने के तकनीकी पहलू
दुर्घटना के तुरंत बाद सामने आई शुरुआती जानकारियों और रिपोर्टों से यह बात स्पष्ट हुई थी कि आग बुझाने के लिए जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल किया गया था। आग की भयावाहता के चलते युद्धपोत बंदरगाह की ओर यानी एक तरफ झुक गया था और तमाम तकनीकी कोशिशों के बावजूद चालक दल और इंजीनियरों द्वारा उसे वापस सीधा करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। जहाज के भीतर भरे भारी पानी के कारण इसका गुरुत्वाकर्षण और संतुलन पूरी तरह से चरमरा गया, जिसके कारण यह अप्रत्याशित और दुखद हादसा घटित हुआ। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने घटना के तुरंत बाद एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस लापरवाही के मूल में कौन-कौन से कारक और जिम्मेदार लोग थे।
युद्धपोत को दोबारा खड़ा करने और सुधार के कार्य
युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र को इस दुर्घटना के बाद पुनः अपनी पूर्व स्थिति में लाने के लिए भारतीय नौसेना को भारी मशक्कत करनी पड़ी और युद्धपोत को दोबारा सीधा करने के उद्देश्य से नौसेना और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा महीनों तक एक लंबा और जटिल सल्वेज ऑपरेशन चलाया गया। अंततः अथक प्रयासों के बाद युद्धपोत को सीधा करने में सफलता प्राप्त हुई, जिसके तुरंत बाद इसकी व्यापक मरम्मत और बहाली का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया। वर्तमान समय में आईएनएस ब्रह्मपुत्र के विभिन्न ट्रायल और परीक्षणों का दौर जारी है, ताकि इसकी संरचनात्मक और तकनीकी मजबूती को परखा जा सके। हालांकि, नौसेना द्वारा इस युद्धपोत को अभी तक औपचारिक रूप से ऑपरेशनल सर्विस यानी सक्रिय सेवा में वापस शामिल नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों और नौसेना के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2027 तक ही आईएनएस ब्रह्मपुत्र के एक बार फिर से समुद्र में सुचारू रूप से संचालन के लिए पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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