राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की 8 घंटे की गहन जांच, बैंक अफसरों और ट्रस्टियों से पूछताछ
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने 8 घंटे की गहन जांच की और बैंक अधिकारियों सहित ट्रस्टियों से पूछताछ कर दस्तावेज जब्त किए।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब एक अत्यंत निर्णायक और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। शुक्रवार को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने रामजन्मभूमि परिसर के भीतर करीब 8 घंटे तक मैराथन जांच पड़ताल की। इस दौरान टीम ने मंदिर परिसर में ही डेरा डाला और उन सभी वित्तीय पहलुओं को खंगाला जो चढ़ावे और ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े थे। एसआईटी की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन रास्तों का पता लगाना है जहां से वित्तीय अनियमितताएं शुरू हुईं और किस तरह से चढ़ावे की राशि में सेंध लगाई गई।
बैंक अधिकारियों और ट्रस्टियों से लंबी पूछताछ
जांच के दौरान एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के लिए की गई भूमि खरीद से जुड़े वित्तीय लेनदेन का बारीकी से सत्यापन किया और इस प्रक्रिया में विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों और नकदी गणना कार्य में लगे बैंक कर्मियों को बुलाकर उनसे लंबी पूछताछ की गई। जांच दल ने यह जानने की कोशिश की कि भूमि खरीद के लिए किए गए भुगतानों में किन नियमों का पालन किया गया था। इसके साथ ही, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ और अनिल मिश्र और व्यवस्थापक गोपाल राव से संबंधित संपत्ति विवरणों का भी गहन परीक्षण किया गया। एसआईटी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों के स्तर पर किसी भी प्रकार की वित्तीय चूक तो नहीं हुई है।
स्टेट बैंक के कर्मचारियों और बैंकिंग प्रक्रिया की जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने विशेष रूप से स्टेट बैंक के उन कर्मचारियों से पूछताछ की है जो मंदिर में आने वाले चढ़ावे की नकदी गिनने के काम में तैनात थे। जांच दल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या नकदी गिनने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का उल्लंघन किया गया था। बैंकिंग प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका अब पूरी तरह से जांच के घेरे में है। एसआईटी यह देख रही है कि क्या बैंक के स्तर पर निगरानी में कोई कमी रही, जिसका फायदा उठाकर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया।
सुरक्षाकर्मी और व्हीलचेयर राइडर भी जांच के घेरे में
इस मामले में अब जांच की आंच दर्शन व्यवस्था से जुड़े निचले स्तर के कर्मचारियों तक भी पहुंच गई है। एसआईटी के रडार पर अब व्हीलचेयर सेवा से जुड़े 3 राइडर और दर्शन सेल के कुछ सुरक्षाकर्मी भी आ गए हैं। जांच एजेंसियों को यह पुख्ता संदेह है कि ये लोग नकदी गणना से जुड़े कर्मियों के लिए ‘कैरियर’ के रूप में काम करते थे। एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि एक राइडर ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ल से वाहन खरीदने के नाम पर 2 लाख रुपये लिए थे। अब इन सभी संदिग्धों की अयोध्या में मौजूद संपत्तियों का विवरण जुटाया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन्होंने अवैध तरीके से धन अर्जित किया है।
ऑडिट दस्तावेजों की जब्ती और जांच की समयसीमा
एसआईटी ने अपनी 8 घंटे की जांच के दौरान आभूषणों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट कर्मी से भी सवाल-जवाब किए। पुराने आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड की जांच करते समय टीम को कुछ गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिनसे जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एसआईटी ने अपने कब्जे में ले लिया है। मामले की गंभीरता और जांच के बढ़ते दायरे को देखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है। तब तक एसआईटी जब्त किए गए दस्तावेजों और दर्ज किए गए बयानों के आधार पर अपनी जांच को और विस्तार देगी ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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