दिल्ली एनसीआर में हवा बिगड़ी एक्यूआई तीन सौ पार होने पर ग्रैप दो लागू, जानें मुख्य अपडेट

दिल्ली एनसीआर में एक्यूआई तीन सौ पार होने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दो नवंबर से ग्रैप दो लागू कर दिया है जिससे कई सख्त कदम उठाए गए हैं।

Nov 2, 2026 - 20:35
 0  0
दिल्ली एनसीआर में हवा बिगड़ी एक्यूआई तीन सौ पार होने पर ग्रैप दो लागू, जानें मुख्य अपडेट

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के हालात को गंभीर रूप से लेते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। राजधानी और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही थी, जिसके मद्देनजर दो नवंबर से तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण यानी ग्रैप दो को लागू कर दिया गया है। इस आदेश के लागू होने के बाद दिल्ली और पड़ोसी शहरों में प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए कई अतिरिक्त और सख्त कदम उठाए जाने लगे हैं। सभी संबंधित विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों को इन सभी उपायों को पूरी सख्ती के साथ जमीन पर उतारने और लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि बिगड़ते हालातों पर काबू पाया जा सके।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर किस तेजी से बढ़ा है, इसे हालिया आंकड़ों से पूरी तरह समझा जा सकता है। बीते इकतीस अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई एक सौ सत्रह दर्ज किया गया था, जो कि एक संतोषजनक या बेहतर स्थिति के आसपास था। लेकिन यह स्थिति बहुत तेजी से बदली और अगले ही दिन यानी एक नवंबर को यह उछलकर दो सौ इकसठ पर पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी की शुरुआत को दर्शाता है। इसके बाद स्थिति और अधिक बिगड़ गई और दो नवंबर को दिल्ली का एक्यूआई बढ़कर तीन सौ चौबीस के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस खतरनाक वृद्धि के कारण दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में पूरी तरह से फंस गई, जिसके चलते आम जनता को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ना शुरू हो गया और सीएक्यूएम को तुरंत प्रभाव से ग्रैप दो लागू करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा।

क्या है ग्रैप स्टेज दो और इसकी व्यवस्था

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक तयशुदा और चरणबद्ध व्यवस्था है, जिसे वायु गुणवत्ता के स्तर और प्रदूषण की वास्तविक स्थिति के हिसाब से अलग-अलग चरणों में लागू किया जाता है। इस व्यवस्था का पहला चरण खराब हवा की स्थिति में, दूसरा चरण बेहद खराब हवा की स्थिति में, तीसरा चरण गंभीर हवा की स्थिति में और चौथा तथा अंतिम चरण बेहद गंभीर वायु गुणवत्ता की स्थिति से जुड़ा होता है। ग्रैप का दूसरा चरण तब सक्रिय किया जाता है जब हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज होने लगती है। इसके लागू होने पर पहले चरण के तमाम नियमित उपाय तो जारी रहते ही हैं, साथ ही प्रदूषण को तेजी से कम करने के लिए कुछ और अतिरिक्त और कड़े कदम उठाए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य हवा में मौजूद खतरनाक धूल के कणों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले कारकों को प्रभावी रूप से कम करना है ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

सड़कों की रोजाना होगी विशेष सफाई और पानी का छिड़काव

ग्रैप दो के प्रावधानों के तहत दिल्ली एनसीआर में सड़कों की साफ-सफाई को लेकर एक विशेष और व्यापक अभियान चलाया जाएगा और इसके अंतर्गत क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और ज्यादा यातायात यानी ट्रैफिक वाले व्यस्त इलाकों में मैकेनिकल स्वीपिंग यानी आधुनिक मशीनों के जरिए सड़कों की सफाई कराई जाएगी। सड़कों की सतह पर जमी हुई धूल और मिट्टी को दोबारा हवा में उड़ने से रोकने के लिए नियमित और तय अंतराल पर पानी का छिड़काव भी किया जाएगा। इसके अलावा प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले हॉटस्पॉट यानी उन तमाम विशेष इलाकों पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जहां हवा की गुणवत्ता सामान्य से अधिक खराब रहती है। इन सभी संवेदनशील स्थानों पर संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को अतिरिक्त सफाई करनी होगी और प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपायों को धरातल पर सुनिश्चित करना होगा। निर्माण स्थलों पर भी धूल और प्रदूषण रोकने के तय नियमों का पूरी तरह पालन कराना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो सके और निर्माण सामग्री को खुले में रखने, उससे धूल उड़ने और अन्य निर्माण गतिविधियों से फैलने वाले प्रदूषण पर अधिकारियों द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी।

निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील और पार्किंग शुल्क वृद्धि

हवा के प्रदूषण को नीचे लाने और वाहनों से होने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए आम जनता से यह पुरजोर अपील की गई है कि वे अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल कम से कम करें और इसके बजाय सार्वजनिक परिवहन यानी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपनाएं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सफर करने के लिए मेट्रो, बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करें ताकि सड़कों पर व्यक्तिगत गाड़ियों का दबाव कम हो सके। इससे सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी और उनसे निकलने वाले जहरीले धुएं को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलेगी। इसके साथ ही इस योजना के तहत पार्किंग की फीस बढ़ाने का भी स्पष्ट प्रावधान रखा गया है। इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों का उपयोग करने से हतोत्साहित करना है ताकि वे मजबूरन या स्वेच्छा से सार्वजनिक परिवहन की तरफ अपना रुख करें और प्रदूषण में गिरावट दर्ज की जा सके।

सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम पर विचार

दिल्ली एनसीआर में लगातार गंभीर होते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए सरकारी कार्यालयों के कामकाज के दैनिक समय में बदलाव करने पर भी बहुत गंभीरता से विचार किया जा रहा है। राजधानी दिल्ली के अलावा आसपास के प्रमुख शहरों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा के सभी सरकारी और अर्द्धसरकारी दफ्तरों के समय में फेरबदल किया जा सकता है। ऐसा करने से दफ्तर आने-जाने के वक्त एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव और जाम की स्थिति को कम करने में मदद मिलने की पूरी उम्मीद है और इसके अलावा कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम यानी अपने घर से ही काम करने की सुविधा देने या सलाह देने पर भी बहुत जोर दिया जा रहा है। इस प्रकार की व्यवस्था लागू होने से सड़कों पर रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले कार्यालयीन वाहनों की संख्या में भारी कमी आ सकती है और प्रदूषण के ग्राफ को नीचे लाने में मदद मिल सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण में आम जनता के सहयोग की अपील

पर्यावरण में फैले प्रदूषण पर मुकम्मल नियंत्रण पाने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों और विभागों की कोशिशें ही काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग भी बेहद जरूरी है। लोगों से यह बार-बार अपील की गई है कि वे बिना किसी बहुत जरूरी काम के अपने निजी वाहनों का बिल्कुल इस्तेमाल न करें, सार्वजनिक परिवहन को अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं और किसी भी ऐसी गतिविधि से पूरी तरह बचें जिससे प्रदूषण और अधिक बढ़ता हो। ग्रैप दो के औपचारिक रूप से लागू होने के बाद अब संपूर्ण दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी उपायों और पाबंदियों को और अधिक तेज कर दिया गया है। अब यह पूरी तरह से संबंधित विभागों और अधिकारियों की मुख्य जिम्मेदारी होगी कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इन सभी दिशा-निर्देशों का बहुत ही प्रभावी तरीके से शत-प्रतिशत पालन कराएं, ताकि दिल्ली और उसके आसपास के तमाम शहरों में रहने वाले लोगों को साफ हवा मिल सके और हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सके।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow