सिंधु जल संधि पर तनाव के बीच लश्कर की पानी से 'जिहाद' की साजिश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

सिंधु जल संधि विवाद के बीच लश्कर-ए-तैयबा मंगला डैम में आतंकियों को पानी के रास्ते हमले की ट्रेनिंग दे रहा है। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

Jul 14, 2026 - 17:35
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सिंधु जल संधि पर तनाव के बीच लश्कर की पानी से 'जिहाद' की साजिश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर लिए गए कड़े फैसलों के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने एक नई और खतरनाक साजिश रचनी शुरू कर दी है। खुफिया इनपुट के अनुसार, लश्कर अब पारंपरिक जमीनी रास्तों के बजाय पानी के रास्तों का इस्तेमाल कर 'जल जिहाद' की तैयारी कर रहा है। इस नई रणनीति के तहत आतंकियों को जलमार्गों के जरिए घुसपैठ और हमले करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं और सीमावर्ती जल क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

मंगला डैम में आतंकियों का प्रशिक्षण शिविर

सुरक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के मंगला डैम इलाके को अपना नया ट्रेनिंग हब बनाया है। खुफिया इनपुट बताते हैं कि लश्कर के वरिष्ठ कमांडर हारिस दार ने हाल ही में एक ट्रेनिंग कैंप में आतंकियों को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान दार ने पानी से जुड़े ऑपरेशनों की तैयारी का विशेष रूप से जिक्र किया। उसने बताया कि आतंकियों का 10 दिन का बेसिक कोर्स पूरा हो चुका है और अब उन्हें मंगला डैम में आगे की एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी। हारिस दार ने आतंकियों को उकसाते हुए कहा कि अब असली काम शुरू होने वाला है और उन्होंने पानी को लेकर अपनी पूरी तैयारी कर ली है।

2026 का लक्ष्य और सिंधु जल संधि का विवाद

हारिस दार के बयानों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि पानी को लेकर हमारा मुख्य मुद्दा भारत के साथ है। दार ने यह दावा भी किया कि साल 2026 में पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर कुछ बड़ा कर सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त रुख के बाद आतंकी संगठन इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों को तेज करने के लिए कर रहे हैं। लश्कर की यह योजना न केवल घुसपैठ तक सीमित है, बल्कि वे जल संसाधनों और बांधों को भी निशाना बनाने की फिराक में हो सकते हैं।

मंगला डैम का आतंकी इतिहास और 26/11 कनेक्शन

मंगला डैम का नाम आतंकी गतिविधियों के लिए नया नहीं है। जांच एजेंसियों के अनुसार, 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रचने वाले आतंकियों को भी इसी मंगला डैम के इलाके में ट्रेनिंग दी गई थी। उस समय भी आतंकियों ने समुद्र के रास्ते भारत में प्रवेश किया था। अब एक बार फिर इसी स्थान का उपयोग जलमार्ग से हमले की ट्रेनिंग के लिए किया जाना इस बात का संकेत है कि लश्कर अपनी पुरानी और घातक कार्यप्रणाली को दोबारा सक्रिय कर रहा है। मंगला डैम की भौगोलिक स्थिति इसे जल-आधारित प्रशिक्षण के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है, जिसका फायदा आतंकी संगठन उठा रहे हैं।

सैफुल्लाह खालिद कसूरी की सक्रियता

इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पहलगाम आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड सैफुल्लाह खालिद कसूरी को भी इसी ट्रेनिंग हब के आसपास देखा गया है। कसूरी जैसे अनुभवी और खतरनाक आतंकी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि लश्कर इस नए मिशन को लेकर कितना गंभीर है। वह अपने पुराने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने और नए रंगरूटों को पानी के रास्ते हमले के लिए तैयार करने में जुटा है। सुरक्षा एजेंसियां कसूरी की गतिविधियों और उसके संपर्कों पर पैनी नजर रख रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी

लश्कर की इन धमकियों और गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब सीमा पार के आतंकी कैंपों, जलमार्गों और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खासकर उन इलाकों में जहां से नदियां पाकिस्तान से भारत में प्रवेश करती हैं या सीमा के करीब बहती हैं, वहां सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया है। सिंधु जल संधि से जुड़े तनाव के बीच आतंकी संगठनों के इन बयानों को सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा बलों को आदेश दिए गए हैं कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध जल-आधारित गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करें।

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